नई दिल्ली: दिल्ली इन दिनों दुनिया के बड़े नेताओं की मेजबानी कर रही है। 12-13 सितंबर को राजधानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल पहुंचे हैं। सुरक्षा से लेकर सड़कों की सजावट तक, राजधानी को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार किया गया है।
लेकिन इसी चमक-दमक के बीच दिल्ली की गरीब बस्तियों को लेकर एक ऐसा सवाल खड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
क्या गरीबी को पर्दे के पीछे किया जा रहा है?
BRICS सम्मेलन से पहले दिल्ली के कुछ इलाकों में झुग्गी-बस्तियों और कम आय वाले इलाकों को बड़े पर्दों और अस्थायी बैरिकेड्स से ढके जाने की खबर सामने आई है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को राजधानी का एक ‘साफ-सुथरा’ चेहरा दिखाने के लिए गरीब बस्तियों को नजरों से दूर किया जा रहा है।
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि सुरक्षा, यातायात और आयोजन की तैयारियों के लिए दिल्ली में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। करीब 25 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, कई मार्गों पर नियंत्रण और VVIP आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसलिए हर बैरिकेड या पर्दे को केवल गरीबी छिपाने की कार्रवाई मानना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल तब गंभीर हो जाता है जब किसी शहर की वास्तविक सामाजिक तस्वीर को अस्थायी तौर पर नजरों से दूर करने की कोशिश दिखाई दे।
दिल्ली सिर्फ चमकती सड़कों का नाम नहीं
दिल्ली की पहचान सिर्फ बड़े सरकारी भवनों, रोशन सड़कों और खूबसूरत चौराहों से नहीं है। यही शहर लाखों मजदूरों, रिक्शा चालकों, घरेलू कामगारों, छोटे दुकानदारों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों की मेहनत से चलता है।
The Wire की एक रिपोर्ट में 2023 में राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि दिल्ली में करीब 15.5 लाख लोग 650 झुग्गी बस्तियों में रहते हैं।
यानी जिस शहर को दुनिया के सामने विकास और आधुनिकता की तस्वीर के रूप में पेश किया जा रहा है, उसी शहर में बड़ी आबादी अभी भी बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक आवास की चुनौती से जूझ रही है।
BRICS का असली सवाल क्या है?
BRICS की थीम ही समावेशी वैश्विक शासन, सहयोग और विकास से जुड़ी है। ऐसे में दिल्ली की गरीबी पर बहस केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
NAYAK | भारतीय नायक का सवाल सीधा है—अगर किसी झुग्गी को पर्दे से ढक दिया जाए तो क्या वहां रहने वाले लोगों की गरीबी खत्म हो जाती है?
किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए शहर को सुंदर बनाना गलत नहीं है। लेकिन असली उपलब्धि तब होगी, जब अगली बार किसी बड़े सम्मेलन से पहले गरीब बस्तियों को छिपाने के बजाय उनके घर, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की समस्याओं को हल करने की तस्वीर दुनिया के सामने रखी जाए।
क्योंकि गरीबी पर पर्दा डाला जा सकता है, गरीबी को खत्म करने के लिए काम करना पड़ता है।
SEO Title
BRICS Summit से पहले दिल्ली में गरीबी पर पर्दा? झुग्गियों को ढकने पर उठे सवाल
Meta Description
BRICS Summit 2026 से पहले दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों को पर्दों और बैरिकेड्स से ढकने को लेकर विवाद। विपक्ष के आरोप और दिल्ली की गरीबी पर उठते सवाल।
SEO Keywords
BRICS Summit 2026, Delhi Slums, Delhi Poverty, BRICS Summit Delhi, दिल्ली झुग्गियां, दिल्ली गरीबी, BRICS भारत, New Delhi BRICS Summit, NAYAK भारतीय नायक
Hashtags
#BRICS2026 #BRICSSummit #Delhi #DelhiSlums #Poverty #NewDelhi #India #NAYAK #भारतीयनायक
Post a Comment