नई दिल्ली/सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद उठे कानूनी सवालों पर हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने मस्जिद प्रबंधन पर लगाए गए ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है।
यह मामला सिर्फ एक धार्मिक इमारत के टूटने तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में जमीन के मालिकाना हक, वक्फ रिकॉर्ड, प्रशासनिक अधिकार और किसी निर्माण को हटाने से पहले अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया जैसे कई अहम सवाल हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्टों के मुताबिक, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी मस्जिद को प्रशासन ने सार्वजनिक जमीन पर अनधिकृत कब्जे से जुड़ा मामला मानते हुए कार्रवाई की थी। शहर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रिमाइसेज (Eviction of Unauthorised Occupants) कानून के तहत बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसी आदेश के साथ मस्जिद प्रबंधन पर करीब ₹6.41 करोड़ का हर्जाना भी लगाया गया।
मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद 5 सितंबर को कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद को गिरा दिया गया।
अब याचिकाकर्ता मोहम्मद तनवीर अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में निचली अदालतों के आदेशों को चुनौती देते हुए दावा किया गया है कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और मस्जिद के वक्फ रजिस्टर में दर्ज होने के पहलू पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
दूसरी तरफ, राज्य सरकार की ओर से इन दावों का विरोध किया गया है। सरकार का पक्ष है कि संबंधित संपत्ति सरकारी रिकॉर्ड में कचहरी/कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज है और जमीन पर निजी स्वामित्व का दावा साबित करने वाला पर्याप्त दस्तावेज अदालत के सामने नहीं रखा गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता को उसके बाद जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।
सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने शहर मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली अगली सुनवाई तक रोक दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण को अवैध घोषित कर दिया है। अदालत फिलहाल मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है।
NAYAK | भारतीय नायक
सहारनपुर का यह मामला एक बुनियादी सवाल सामने रखता है—जब किसी धार्मिक स्थल या सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े विवाद में कार्रवाई होती है, तो क्या हर सवाल का जवाब कानून और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए नहीं मिलना चाहिए?
मस्जिद सरकारी जमीन पर थी या निजी/वक्फ संपत्ति थी, यह अंतिम रूप से अदालत और संबंधित रिकॉर्ड तय करेंगे। लेकिन लोकतंत्र में प्रशासनिक शक्ति के साथ न्यायिक जांच भी उतनी ही जरूरी है।
किसी भी पक्ष के दावे से पहले दस्तावेज देखे जाएं, कानून की प्रक्रिया पूरी हो और अदालत को अपना फैसला करने का पूरा अवसर मिले—यही संवैधानिक व्यवस्था की असली कसौटी है।
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सहारनपुर मस्जिद मामले में हाईकोर्ट का दखल, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर रोक
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा और ₹6.41 करोड़ हर्जाने की वसूली पर रोक लगाई।
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