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अनवर इब्राहिम का पहलगाम पर बयान: हमास पर इजरायल को घेरा, पाकिस्तान पर क्यों नहीं बोले साफ?


नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इंटरव्यू में उनसे इजरायल-हमास संघर्ष और फिर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान की कथित भूमिका पर सवाल पूछा गया। जवाबों को लेकर पाकिस्तान में भी इस क्लिप को खूब साझा किया जा रहा है।

इंटरव्यू की शुरुआत इजरायल की कार्रवाई से जुड़े सवाल से हुई। जब अनवर इब्राहिम से पूछा गया कि क्या वह हमास के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई को आतंकवाद या ‘स्टेट टेररिज्म’ मानते हैं, तो उन्होंने इसे स्टेट टेररिज्म बताया।

इसके बाद इंटरव्यू का सवाल भारत से जुड़े उस मुद्दे पर पहुंचा, जो देश में बेहद संवेदनशील है—22 अप्रैल 2025 का पहलगाम आतंकी हमला और पाकिस्तान की कथित भूमिका।

जब उनसे पूछा गया कि क्या कश्मीर में पहलगाम हमले और भारत के खिलाफ पाकिस्तान की कथित गतिविधियों को भी स्टेट टेररिज्म माना जाना चाहिए, तो अनवर इब्राहिम ने कहा कि वह “इतनी दूर” नहीं जाएंगे। उन्होंने भारत की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी मित्र हैं और पाकिस्तान के साथ भी बातचीत करते हैं।

लेकिन इंटरव्यू का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसके बाद आया। उनसे पूछा गया कि जब भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का शिकार होने की बात कहता रहा है, तो वह पाकिस्तान की आलोचना करने में इतने स्पष्ट क्यों नहीं हैं।

अनवर इब्राहिम ने जवाब दिया कि किसी देश की संलिप्तता का दावा ठोस सबूतों से साबित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी और भारत के साथ बातचीत में उन्हें ऐसा ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे वह यह निष्कर्ष निकाल सकें कि पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान का ‘स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म’ था। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह भारतीय पक्ष की दी गई जानकारियों को खारिज नहीं कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच खुफिया तथा रक्षा सहयोग जारी है।

यहां एक महत्वपूर्ण संदर्भ भी समझना जरूरी है। अनवर इब्राहिम का मौजूदा बयान मलेशिया के पूरे आधिकारिक रुख का पर्याय नहीं माना जा सकता। पहलगाम हमले के बाद 2025 में मलेशिया ने हमले की निंदा की थी। बाद में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनवर इब्राहिम को पहलगाम हमले की कड़ी निंदा के लिए धन्यवाद दिया था।

इसके अलावा फरवरी 2026 में भारत और मलेशिया के बीच जारी संयुक्त रुख में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों, जिसमें क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म भी शामिल है, की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

यही वजह है कि वायरल इंटरव्यू ने नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ अनवर इब्राहिम सबूत और निष्पक्ष तथ्य की जरूरत पर जोर देते दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत का आधिकारिक रुख सीमा पार आतंकवाद को लेकर बेहद स्पष्ट रहा है।

सवाल अब सिर्फ एक इंटरव्यू का नहीं है। सवाल यह भी है कि आतंकवाद के मामलों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीतिक रिश्ते और उपलब्ध खुफिया सूचनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। पहलगाम के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल आज भी यही है कि इस हमले के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की सच्चाई दुनिया के सामने कब और किस तरह पूरी तरह सामने आएगी।

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