कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच बांटी गई दवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बर्रा के मायापुरम इलाके में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें ऐसी कफ सिरप दी, जिसकी एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 में ही खत्म हो चुकी थी। कुछ परिवारों का यह भी दावा है कि सिरप लेने के बाद बच्चों और अन्य लोगों को बुखार, उल्टी या दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हुईं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों से इनकार किया है।
मामला ऐसे समय सामने आया है जब पांडु नदी में आई बाढ़ से कानपुर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और स्वास्थ्य सेवाओं के तहत मायापुरम क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी। रिपोर्टों के मुताबिक, 7 सितंबर को करीब 20 बाढ़ प्रभावित परिवारों को दवाएं दी गई थीं। इसी दौरान बांटी गई 50 मिलीलीटर की एक सिरप की बोतल को लेकर विवाद शुरू हुआ।
बताया गया है कि बोतल पर ‘Trimethoprim and Sulphamethoxazole Oral Suspension IP’ लिखा था। पैकेजिंग पर निर्माण की तारीख अगस्त 2024 और एक्सपायरी जुलाई 2026 दर्ज होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सितंबर में इस दवा का वितरण किया गया, यानी कथित तौर पर उसकी निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी थी।
स्थानीय निवासी मीना बी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने अपने बेटे को सिरप दी, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हुई। परिवार के मुताबिक बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। एक अन्य स्थानीय महिला नानकी ने भी बुखार की शिकायत होने की बात कही। हालांकि, किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने और कथित एक्सपायर्ड दवा के सेवन के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी स्वतंत्र जांच से स्थापित नहीं हुआ है।
विवाद बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी सामने आया। कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरि दत्त नेमी ने कहा कि संबंधित दवा जुलाई 2025 में विभाग के स्टॉक का हिस्सा थी और मांग के आधार पर कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से वितरित की गई थी। उनका कहना है कि हाल में वितरित की गई दवा विभाग के मौजूदा स्टॉक का हिस्सा नहीं है और संबंधित बैच नंबर भी वर्तमान स्टॉक में मौजूद नहीं है। उन्होंने दवा वापस लेने के बदले लोगों को पैसे देने के आरोप से भी इनकार किया है।
यानी इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर स्थानीय लोगों के पास मौजूद बोतलों पर जुलाई 2026 की एक्सपायरी दर्ज है, तो वे बोतलें बाढ़ प्रभावित परिवारों तक कैसे पहुंचीं? क्या वितरण से पहले दवाओं के बैच और एक्सपायरी डेट की जांच हुई थी? और अगर हुई थी, तो फिर यह विवाद पैदा कैसे हुआ?
बाढ़ जैसी आपदा में राहत सिर्फ भोजन और सुरक्षित ठिकाने तक सीमित नहीं होती। प्रभावित लोगों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। खासकर बच्चों से जुड़ी दवाओं के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल आरोपों और सरकारी सफाई के बीच तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष जांच, संबंधित दवा के बैच की जांच और यह पता लगाना जरूरी है कि दवा आखिर किस प्रक्रिया से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पहुंची। क्योंकि राहत के नाम पर पहुंचने वाली हर चीज में सबसे पहले इंसान की सुरक्षा और भरोसा होना चाहिए।
ताज़ा रिपोर्टों को क्रॉस-चेक करते हुए नीचे लेख तैयार किया है। इसमें स्थानीय लोगों के आरोप और स्वास्थ्य विभाग के इनकार—दोनों पक्ष रखे गए हैं, ताकि खबर तथ्यात्मक रहे और किसी अपुष्ट दावे को तथ्य की तरह पेश न किया जाए।
कानपुर में बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायरी कफ सिरप देने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग के दावे से उठे सवाल
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच बांटी गई दवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बर्रा के मायापुरम इलाके में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें ऐसी कफ सिरप दी, जिसकी एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 में ही खत्म हो चुकी थी। कुछ परिवारों का यह भी दावा है कि सिरप लेने के बाद बच्चों और अन्य लोगों को बुखार, उल्टी या दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हुईं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों से इनकार किया है।
मामला ऐसे समय सामने आया है जब पांडु नदी में आई बाढ़ से कानपुर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और स्वास्थ्य सेवाओं के तहत मायापुरम क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी। रिपोर्टों के मुताबिक, 7 सितंबर को करीब 20 बाढ़ प्रभावित परिवारों को दवाएं दी गई थीं। इसी दौरान बांटी गई 50 मिलीलीटर की एक सिरप की बोतल को लेकर विवाद शुरू हुआ।
बताया गया है कि बोतल पर ‘Trimethoprim and Sulphamethoxazole Oral Suspension IP’ लिखा था। पैकेजिंग पर निर्माण की तारीख अगस्त 2024 और एक्सपायरी जुलाई 2026 दर्ज होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सितंबर में इस दवा का वितरण किया गया, यानी कथित तौर पर उसकी निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी थी।
स्थानीय निवासी मीना बी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने अपने बेटे को सिरप दी, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हुई। परिवार के मुताबिक बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। एक अन्य स्थानीय महिला नानकी ने भी बुखार की शिकायत होने की बात कही। हालांकि, किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने और कथित एक्सपायर्ड दवा के सेवन के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध अभी स्वतंत्र जांच से स्थापित नहीं हुआ है।
विवाद बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग का पक्ष भी सामने आया। कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरि दत्त नेमी ने कहा कि संबंधित दवा जुलाई 2025 में विभाग के स्टॉक का हिस्सा थी और मांग के आधार पर कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से वितरित की गई थी। उनका कहना है कि हाल में वितरित की गई दवा विभाग के मौजूदा स्टॉक का हिस्सा नहीं है और संबंधित बैच नंबर भी वर्तमान स्टॉक में मौजूद नहीं है। उन्होंने दवा वापस लेने के बदले लोगों को पैसे देने के आरोप से भी इनकार किया है।
यानी इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर स्थानीय लोगों के पास मौजूद बोतलों पर जुलाई 2026 की एक्सपायरी दर्ज है, तो वे बोतलें बाढ़ प्रभावित परिवारों तक कैसे पहुंचीं? क्या वितरण से पहले दवाओं के बैच और एक्सपायरी डेट की जांच हुई थी? और अगर हुई थी, तो फिर यह विवाद पैदा कैसे हुआ?
बाढ़ जैसी आपदा में राहत सिर्फ भोजन और सुरक्षित ठिकाने तक सीमित नहीं होती। प्रभावित लोगों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। खासकर बच्चों से जुड़ी दवाओं के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल आरोपों और सरकारी सफाई के बीच तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष जांच, संबंधित दवा के बैच की जांच और यह पता लगाना जरूरी है कि दवा आखिर किस प्रक्रिया से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पहुंची। क्योंकि राहत के नाम पर पहुंचने वाली हर चीज में सबसे पहले इंसान की सुरक्षा और भरोसा होना चाहिए।SEO Title: कानपुर बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायरी कफ सिरप देने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग ने किया इनकार
Meta Description: कानपुर के मायापुरम में बाढ़ पीड़ितों को कथित तौर पर जुलाई 2026 में एक्सपायर हो चुकी कफ सिरप बांटने का आरोप लगा है। स्थानीय लोगों की शिकायत और स्वास्थ्य विभाग की सफाई जानिए।
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