कटिहार, बिहार:
“साहब, हमारा स्कूल चोरी हो गया है… उसे ढूंढकर दीजिए।” आम तौर पर चोरी की शिकायत में सामान, घर या वाहन का जिक्र होता है, लेकिन बिहार के कटिहार से आई यह शिकायत इसलिए हैरान करने वाली है क्योंकि यहां ग्रामीणों का दावा है कि स्कूल ही गायब हो गया। वह भी ऐसा स्कूल, जिसके निर्माण पर सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपये खर्च होने की बात दर्ज है।
मामला कटिहार के प्राणपुर प्रखंड के दीघापार स्थित नए प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई और विरोध का तरीका भी ऐसा चुना, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। ग्रामीण ढोल-नगाड़े बजाते हुए कलेक्टरेट पहुंचे और अधिकारियों से स्कूल को ‘ढूंढने’ की मांग की।
44.85 लाख रुपये, लेकिन जमीन पर स्कूल कहां है?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विद्यालय भवन के निर्माण के लिए करीब 44.85 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। उपलब्ध सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड के आधार पर यह रकम अलग-अलग किस्तों में जारी होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहली किस्त के तौर पर अप्रैल 2024 में 15 लाख रुपये, दूसरी किस्त सितंबर 2024 में 15 लाख रुपये और तीसरी किस्त मार्च 2025 में 14.85 लाख रुपये का भुगतान दर्ज है। इसके बाद 25 मार्च 2025 को भवन निर्माण पूरा होने का प्रमाण पत्र भी जारी किए जाने की बात सामने आई।
लेकिन ग्रामीणों का सवाल यही है कि अगर सरकारी कागजों में भवन बनकर तैयार हो चुका है, तो फिर जमीन पर वह भवन दिखाई क्यों नहीं देता?
ग्रामीणों का अनोखा विरोध, प्रशासन से जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध कराने में सहयोग किया था। उनका आरोप है कि जिस विद्यालय भवन के नाम पर सरकारी राशि खर्च होने की बात रिकॉर्ड में दर्ज है, वह वास्तविक स्थल पर मौजूद नहीं है।
इसी शिकायत को लेकर ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और अनुमंडल प्रशासन के अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले की जांच की मांग की। रिपोर्टों के अनुसार, सदर एसडीओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थल का भौतिक सत्यापन कराने की बात कही है।
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि किसी व्यक्ति या एजेंसी को दोषी मान लेना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। सरकारी रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया, निर्माण स्थल और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई।
NAYAK | भारतीय नायक का सवाल
यह मामला सिर्फ एक स्कूल भवन का नहीं है। यह उस भरोसे का सवाल है जो गांव का एक परिवार सरकारी व्यवस्था पर करता है। जब गरीब और ग्रामीण परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजते हैं, तो उन्हें उम्मीद होती है कि सरकार उनके बच्चों के लिए कम से कम एक सुरक्षित कक्षा तो उपलब्ध कराएगी।
NAYAK | भारतीय नायक का सवाल सीधा है—अगर कागजों पर स्कूल बन गया और जमीन पर स्कूल दिखाई नहीं देता, तो उन कागजों की जिम्मेदारी किसकी है? पैसा किस प्रक्रिया से जारी हुआ? निर्माण पूरा होने का प्रमाण किस आधार पर दिया गया? और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?
सरकारी योजनाओं की असली सफलता कागजों में नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों में होती है। अब कटिहार के ग्रामीणों को भी यही उम्मीद है कि उनकी ‘स्कूल चोरी’ वाली शिकायत सिर्फ खबर बनकर न रह जाए, बल्कि निष्पक्ष जांच के बाद सच सामने आए और बच्चों को उनका स्कूल मिले।
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कटिहार में ‘स्कूल चोरी’ का मामला: कागजों पर बना 44.85 लाख का स्कूल, जमीन पर नहीं मिली एक ईंट
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कटिहार के प्राणपुर में ग्रामीणों ने ‘स्कूल चोरी हो गया साहब’ कहते हुए प्रशासन से शिकायत की। रिपोर्टों के मुताबिक 44.85 लाख रुपये के स्कूल भवन का निर्माण कागजों पर पूरा दिखाया गया, लेकिन जमीन पर भवन नहीं मिला।
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