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ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान का अमेरिका-इजरायल को संदेश, बोले- ‘दादागीरी के आगे नहीं झुकेंगे’


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। नई दिल्ली में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान किसी तरह की “दादागीरी” और “अहंकार” के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।

पेजेशकियान इस समय भारत की यात्रा पर हैं और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ा हुआ है और पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर सुरक्षा, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक दिखाई दे रहा है।

‘दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है ईरान’

धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में पेजेशकियान ने ईरान के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका देश दबाव के सामने अपनी नीतियां नहीं बदलेगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ दबाव बनाने और सैन्य कार्रवाई करने के आरोप लगाए।

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उनका देश पश्चिम एशिया में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहता है। यानी एक तरफ तेहरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ वह क्षेत्र में स्थायी शांति की आवश्यकता पर भी जोर दे रहा है।

पेजेशकियान ने ईरानी समाज के भीतर मतभेद पैदा करने की कोशिशों का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि विदेशी ताकतें समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही हैं और ईरान ऐसी कोशिशों का मुकाबला करेगा। यह बयान बताता है कि तेहरान मौजूदा संकट को केवल बाहरी सैन्य दबाव के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक स्थिरता से जुड़े मुद्दे के रूप में भी देख रहा है।

भारत में क्यों महत्वपूर्ण है पेजेशकियान का बयान?

पेजेशकियान का यह बयान भारत में आया है, इसलिए इसकी कूटनीतिक अहमियत भी बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेजेशकियान के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बातचीत भी हुई। मोदी ने इस दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा, व्यापार की स्वतंत्रता और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर दिया।

पश्चिम एशिया में तनाव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले समुद्री रास्ते वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। संघर्ष बढ़ने पर तेल की कीमतों, शिपिंग और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालिया घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इस चिंता का असर दिखाई दे रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि पेजेशकियान ने एक अन्य कार्यक्रम में यह भी कहा कि वह अमेरिका के साथ युद्ध जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ईरान को आगे आने वाली परिस्थितियों के लिए अपनी मजबूती बढ़ानी चाहिए।

NAYAK | भारतीय नायक का सवाल

ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी टकराव अब सिर्फ तीन देशों का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका असर खाड़ी क्षेत्र, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है।

NAYAK | भारतीय नायक की नजर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुनिया के बड़े देश सैन्य टकराव को आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता निकाल पाएंगे?

किसी भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी और क्षेत्रीय शांति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पेजेशकियान का बयान जहां ईरान के दृढ़ रुख को दिखाता है, वहीं उनका शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश यह संकेत भी देता है कि इस संकट का स्थायी समाधान आखिरकार बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है।

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ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान का अमेरिका-इजरायल को कड़ा संदेश, बोले- दादागीरी के आगे नहीं झुकेंगे

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने नई दिल्ली में अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव के आगे नहीं झुकेगा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा।

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