भोपाल: मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह से जुड़े कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी मामले में अब एक अहम प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राज्य मंत्रिमंडल के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अभियोजन स्वीकृति नहीं देने की बात कही गई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है और विशेष जांच दल यानी SIT अपनी जांच पूरी कर चुका है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत मई 2025 में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी से हुई थी। कर्नल सोफिया कुरैशी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की ओर से मीडिया ब्रीफिंग करने वाली अधिकारियों में शामिल थीं। शाह की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और मामला अदालत तक पहुंच गया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने का निर्देश दिया था। बाद में SIT ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार की।
SIT की जांच पूरी, लेकिन अभियोजन की मंजूरी बनी रही अहम
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अभियोजन की स्वीकृति को लेकर था। 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद कवर में रखी गई है। हालांकि, अभियोजन की स्वीकृति का फैसला उस समय तक लंबित था। कोर्ट को यह भी बताया गया कि मंजूरी मिलने के बाद ही आरोपपत्र दाखिल किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने संकेत दिया था कि इस संबंध में फैसला जल्द लिया जा सकता है। उस समय मामला राज्यपाल के स्तर पर लंबित बताया गया था।
इसके बाद उसी दिन मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 25 अगस्त को राज्य कैबिनेट द्वारा लिए गए उस फैसले को मंजूरी दे दी, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं देने की सिफारिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने देरी पर जताई थी नाराजगी
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय में हो रही देरी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार से सवाल कर चुका था। मई 2026 में अदालत ने राज्य सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। इससे पहले जनवरी में भी अदालत ने सरकार को तय समय में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को केवल राजनीतिक विवाद के तौर पर नहीं देखा, बल्कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी और कानून की प्रक्रिया के संदर्भ में भी सवाल उठाए। अदालत की टिप्पणियों से साफ था कि वह मामले में प्रशासनिक देरी से संतुष्ट नहीं थी।
अब आगे क्या होगा?
राज्यपाल की मंजूरी के बाद फिलहाल विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की सरकारी स्वीकृति नहीं है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया। मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है और अदालत आगे की कार्यवाही में राज्य के इस निर्णय पर विचार कर सकती है।
SIT की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि उसकी रिपोर्ट सीलबंद है। यदि अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जाती है तो जांच की आगे की कानूनी दिशा भी इसी फैसले से प्रभावित होगी। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट पहले ही मामले में प्रशासनिक देरी और कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर गंभीरता दिखा चुका है।
निष्कर्ष
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। राज्यपाल ने अभियोजन स्वीकृति नहीं देने के कैबिनेट के फैसले को मंजूरी दे दी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत की अगली कार्रवाई इस पूरे विवाद की कानूनी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
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