अयोध्या: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद अब उसके प्रशासन और संचालन को लेकर ट्रस्ट ने अपने ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में लंबा अनुभव रखने वाले मिश्रा अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व भी किया था।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट को मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक कामकाज, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और वित्तीय प्रबंधन जैसे कई मोर्चों पर एक व्यवस्थित व्यवस्था की जरूरत महसूस हो रही है। खास तौर पर मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़े कथित चोरी और गबन के विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। इस मामले में आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।
करीब चार दशक की सैन्य सेवा के बाद नई जिम्मेदारी
जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्षों तक सेवाएं दीं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना ज्वाइन की थी और 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए। अपने सैन्य करियर के दौरान वह कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहे और पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख भी रहे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के कारण भी उनकी नियुक्ति को खास महत्व मिल रहा है। अब सैन्य कमान और प्रशासन का अनुभव रखने वाले मिश्रा को देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।
मिश्रा को अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
CEO की नियुक्ति के लिए मिली थीं हजारों अर्जियां
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति के लिए बाकायदा चयन प्रक्रिया अपनाई। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वैज्ञानिक सुरेश हावरे की तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी।
रिपोर्टों के मुताबिक CEO पद के लिए 5,500 से अधिक आवेदन मिले थे। स्क्रीनिंग के बाद योग्य उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया गया और अंततः जीतेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी।
यह तथ्य अपने आप में बताता है कि ट्रस्ट ने इस पद के लिए किस स्तर की प्रक्रिया अपनाई। CEO की जिम्मेदारी सिर्फ मंदिर परिसर तक सीमित नहीं होगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और मंदिर से जुड़े विभिन्न परिचालन कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
ट्रस्ट में और भी बड़े बदलाव
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने अपने संगठन में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया गया है, जबकि महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। डॉ. निर्मला यादव का ट्रस्ट में शामिल होना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वह इसकी पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं।
चढ़ावा विवाद के बीच नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण?
राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा और दान लंबे समय से मंदिर व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाल ही में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी और गबन के आरोपों ने ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने इस मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।
ऐसे माहौल में CEO की नियुक्ति को सिर्फ एक नया पद भरना नहीं माना जा रहा। यह मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखी जा रही है।
आगे की चुनौती
जीतेंद्र मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—आस्था के इस विशाल केंद्र को पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से चलाना। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही, मंदिर परिसर का प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था, वित्तीय निगरानी और भविष्य की योजनाएं उनके सामने बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।
सेना से मंदिर प्रशासन तक का यह सफर निश्चित तौर पर अलग तरह की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि सैन्य सेवा से मिले अनुशासन और प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल मिश्रा अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था को किस तरह मजबूत करने में करते हैं।
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