मंडी/नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी में जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए एक पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में जाति आधारित सामाजिक वर्गीकरण के संदर्भ में ‘शूद्रों को उच्च वर्गों की सेवा करनी चाहिए’ जैसी बात लिखी गई थी। पोस्टर सामने आने के बाद जातिगत भेदभाव को लेकर सवाल उठे और संस्थान प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए।
यह पोस्टर 4 सितंबर को जन्माष्टमी कार्यक्रम के दौरान संस्थान के सभागार के बाहर लगाया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, पोस्टर का शीर्षक ‘भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ था। इसमें समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जैसे चार वर्गों में बांटकर उनकी भूमिकाओं को अलग-अलग तरीके से बताया गया था। विवाद सबसे ज्यादा उस हिस्से को लेकर हुआ, जिसमें शूद्रों की भूमिका को उच्च वर्गों की सेवा से जोड़ा गया था।
पोस्टर पर विवाद बढ़ा तो प्रशासन ने लिया संज्ञान
पोस्टर की तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठने लगे। आलोचकों ने इसे जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला संदेश बताया। मामला बढ़ने के बाद IIT मंडी प्रशासन ने जांच समिति गठित की।
संस्थान के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि उन्हें पोस्टर के बारे में जानकारी मिलने पर धक्का लगा और IIT मंडी किसी भी तरह के जातिगत भेदभाव का समर्थन नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान परिसर का इस्तेमाल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली किसी गतिविधि के लिए नहीं होना चाहिए।
प्रशासन की ओर से गठित समिति में संकाय सदस्यों के साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, समिति में अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पोस्टर किसने तैयार किया, इसे कार्यक्रम स्थल पर किस अनुमति से लगाया गया और उसमें लिखी सामग्री का उद्देश्य क्या था।
निदेशक ने दी अलग व्याख्या
IIT मंडी के निदेशक ने इस विवाद पर कहा कि कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की एक विशेष तरह से व्याख्या की है और यह पोस्टर छात्रों द्वारा आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा था। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि संस्थान खुद इस तरह की जातिगत सोच का समर्थन नहीं करता।
निदेशक का भगवद्गीता के अध्ययन और अध्यापन से पुराना जुड़ाव भी रहा है। वह IIT मंडी में भगवद्गीता से संबंधित एक क्रेडिट पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं। इसी वजह से विवाद के बीच उनकी भूमिका और संस्थान की अकादमिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा शुरू हुई है।
कैंपस में बराबरी के संदेश पर बहस
IIT जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों से छात्रों को वैज्ञानिक सोच, तर्क और समानता का माहौल मिलने की उम्मीद रहती है। ऐसे में किसी पोस्टर में जाति के आधार पर सामाजिक भूमिकाओं का उल्लेख होना स्वाभाविक रूप से गंभीर बहस को जन्म देता है।
हालांकि, इस पूरे मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है। इसलिए पोस्टर लगाने वाले व्यक्ति या समूह की मंशा के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पोस्टर किस संदर्भ में तैयार किया गया था और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
ताजा जानकारी के मुताबिक, IIT मंडी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच आगे बढ़ाई है और अब नजर इस बात पर है कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष देती है।
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IIT मंडी में जन्माष्टमी समारोह के दौरान ‘शूद्रों को उच्च वर्गों की सेवा करनी चाहिए’ वाले पोस्टर पर विवाद खड़ा हो गया। संस्थान ने जांच समिति गठित की है और निदेशक ने पोस्टर से संस्थान को अलग किया है।
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