आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में बिना मान्यता संचालित शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 58 ऐसे निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिन्हें बिना जरूरी मान्यता के संचालित पाया गया। साथ ही इन स्कूलों का संचालन तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, 73 मदरसों को अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं बिना आवश्यक विभागीय एनओसी या संबद्धता के चलाने के आरोप में नोटिस जारी किए गए हैं।
इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—जब देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध या नियमों के विपरीत संचालित इमारतों और हॉस्टल को लेकर हादसे चिंता बढ़ा रहे हैं, तो शिक्षा विभाग की निगरानी और कार्रवाई का दायरा कितना व्यापक है? हालांकि, आगरा की यह कार्रवाई दिल्ली या किसी दूसरे शहर में हुए हॉस्टल हादसों से सीधे जुड़ी हुई नहीं है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के मानकों को लेकर यह सवाल जरूर उठाती है।
58 स्कूलों पर लगा एक-एक लाख रुपये का जुर्माना
बेसिक शिक्षा विभाग की जांच में आगरा के कई इलाकों में ऐसे स्कूल मिले, जहां आवश्यक मान्यता के बिना कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। कार्रवाई की सूची में बाह, जैतपुर कलां, पिनाहट, शमसाबाद, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा और आगरा नगर सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।
विभाग के अनुसार, इन स्कूल संचालकों को पहले नोटिस देकर स्पष्टीकरण और जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे। कुछ संचालकों ने जवाब नहीं दिया, जबकि कुछ के जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगे। इसके बाद कार्रवाई की गई।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत बिना मान्यता स्कूल संचालित करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
73 मदरसों को तीन दिन का अल्टीमेटम
इसी कार्रवाई के दूसरे हिस्से में बेसिक शिक्षा विभाग ने 73 मदरसों को नोटिस जारी किए हैं। विभाग का कहना है कि इन संस्थानों को मदरसा बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम की मान्यता प्राप्त है, लेकिन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम/सीबीएसई कक्षाएं संचालित करने के लिए आवश्यक एनओसी या संबद्धता नहीं ली गई थी।
इन मदरसों से तीन दिन के भीतर दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही संबंधित अमान्य कक्षाओं को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला या नियमों के विपरीत संचालन जारी रहा तो जुर्माना, प्रतिदिन अतिरिक्त अर्थदंड और जरूरत पड़ने पर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई के लिए संबंधित बोर्ड को संस्तुति भेजी जा सकती है।
सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बच्चों की सुरक्षा का भी
नियमों के खिलाफ चल रहे किसी भी शिक्षण संस्थान पर कार्रवाई जरूरी है, चाहे वह निजी स्कूल हो या कोई अन्य शैक्षणिक संस्था। लेकिन सवाल यह भी है कि ऐसी संस्थाओं की पहचान हादसा होने से पहले क्यों नहीं हो पाती?
बच्चों से जुड़ी शिक्षा और सुरक्षा के मामले में केवल नोटिस या जुर्माना ही नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण, भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
आगरा की कार्रवाई से कम से कम इतना स्पष्ट है कि विभाग ने बिना मान्यता संचालित संस्थानों पर निगरानी बढ़ाई है। अब देखना होगा कि नोटिस और जुर्माने के बाद वास्तव में नियमों का पालन कितना सुनिश्चित होता है।
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आगरा में बिना मान्यता संचालित 58 निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 73 मदरसों को बिना जरूरी एनओसी या संबद्धता के अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं चलाने पर नोटिस जारी हुआ है।
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