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नेपाल में गोरखा भर्ती को लेकर फिर उठा सवाल, पोखरा में युवाओं और पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन


NAYAK भारतीय नायक | विशेष रिपोर्ट

नेपाल के पोखरा शहर में भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ है। पूर्व गोरखा सैनिकों, उनके परिवारों और युवाओं ने भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत गोरखा युवाओं की भर्ती फिर शुरू करने की मांग उठाई। 12 अगस्त को हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सरकार से भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक को लेकर जल्द फैसला लेने की अपील की गई।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की एक अहम कड़ी रही है। नेपाल के युवाओं की भारतीय सेना में सेवा करने की परंपरा कई पीढ़ियों पुरानी है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भर्ती प्रक्रिया रुकने के कारण बड़ी संख्या में इच्छुक युवाओं के सामने अनिश्चितता पैदा हुई है।

अग्निपथ योजना के बाद बदली तस्वीर

भारत सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना लागू की थी। इस योजना के तहत सैनिकों की एक निश्चित अवधि के लिए भर्ती की जाती है और चार साल की सेवा के बाद सीमित संख्या में युवाओं को आगे स्थायी सेवा का अवसर मिलता है। बाकी युवाओं को सेवा पूरी होने के बाद निर्धारित आर्थिक पैकेज और अन्य सहायता के साथ बाहर किया जाता है।

नेपाल सरकार ने इस नई व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी वजह से नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में नई भर्ती आगे नहीं बढ़ सकी।

पोखरा में युवाओं ने क्यों उठाई आवाज?

प्रदर्शन में शामिल युवाओं और पूर्व सैनिकों का तर्क है कि नेपाल में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच भारतीय सेना में भर्ती उनके लिए सम्मान और रोजगार दोनों का रास्ता रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने के बजाय वे भारतीय सेना में अग्निवीर के तौर पर सेवा करने का अवसर चाहते हैं।

इस मांग को केवल रोजगार के मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। गोरखा समुदाय के लिए भारतीय सेना में सेवा करना लंबे समय से सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक परंपरा से भी जुड़ा रहा है।

भारत-नेपाल रिश्तों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा

गोरखा भर्ती का मुद्दा दोनों देशों के बीच पुराने सैन्य संबंधों से जुड़ा है। 1947 के भारत-नेपाल-ब्रिटेन त्रिपक्षीय समझौते के बाद गोरखा सैनिकों की भर्ती और सेवा व्यवस्था को एक विशेष ढांचे में आगे बढ़ाया गया था।

इसी पृष्ठभूमि में अग्निपथ योजना के बाद पैदा हुआ गतिरोध केवल भर्ती का प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। इसके साथ नेपाल की संप्रभुता, युवाओं के रोजगार और भारत-नेपाल के ऐतिहासिक सैन्य संबंध जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं।

अब फैसले का इंतजार

पोखरा का प्रदर्शन बताता है कि नेपाली युवाओं के बीच यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का अंतिम निर्णय नेपाल सरकार और भारत के बीच बातचीत तथा संबंधित नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश पुरानी गोरखा भर्ती व्यवस्था और अग्निपथ की नई प्रणाली के बीच कोई ऐसा रास्ता निकाल पाएंगे, जिससे नेपाली युवाओं की मांग और दोनों देशों की नीतिगत चिंताओं के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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