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UPSC Success Story: रेलवे की नौकरी करते-करते हासिल की बड़ी सफलता, कुशीनगर के वसीम अकरम बने मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स में असिस्टेंट डायरेक्टर


 कुशीनगर के वसीम अकरम बने असिस्टेंट डायरेक्टर, रेलवे की नौकरी करते हुए UPSC में पाई बड़ी सफलता

 उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के वसीम अकरम ने रेलवे में नौकरी करते हुए UPSC के माध्यम से मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स में असिस्टेंट डायरेक्टर (जिला युवा अधिकारी) का पद हासिल किया। जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी।

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NAYAK भारतीय नायक | NayakMedia.in | कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पिपरा अग्रवा गांव के रहने वाले वसीम अकरम ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। भारतीय रेलवे में नौकरी करते हुए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कठिन परीक्षा पास कर मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स, भारत सरकार में असिस्टेंट डायरेक्टर (जिला युवा अधिकारी) के प्रतिष्ठित पद पर चयन हासिल किया है।

उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे कुशीनगर, तमकुहीराज और उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की यह कहानी हजारों प्रतियोगी छात्रों को नई ऊर्जा देती है।


साधारण परिवार से निकलकर बनाई असाधारण पहचान

वसीम अकरम के पिता मंसूर अली एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा और मेहनत को प्राथमिकता दी। बचपन से ही वसीम पढ़ाई में गंभीर रहे और उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें सरकारी सेवा में एक बड़ी जिम्मेदारी निभानी है।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा SP मॉन्टेसरी स्कूल, तमकुही रोड से हुई। उन्होंने इसी विद्यालय से पांचवीं कक्षा से हाईस्कूल तक की पढ़ाई पूरी की। स्कूल के दिनों से ही अनुशासन और मेहनत उनके व्यक्तित्व की पहचान बन चुके थे।


डिप्लोमा से बीटेक तक का सफर

हाईस्कूल के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र को चुना। वर्ष 2012 में गौतम बुद्ध नगर (कानपुर परिसर) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया।

इसके बाद उन्होंने अपनी तकनीकी शिक्षा जारी रखते हुए 2016 में लखनऊ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की।

इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद उनके सामने कई निजी क्षेत्र के अवसर थे, लेकिन उनका लक्ष्य सरकारी सेवा था। इसलिए उन्होंने लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।


रेलवे में नौकरी मिली, लेकिन सपना इससे भी बड़ा था

लगातार मेहनत के बाद 16 सितंबर 2020 को वसीम अकरम का चयन भारतीय रेलवे में हुआ और उन्होंने वेस्टर्न रेलवे, मुंबई सेंट्रल में अपनी सेवाएं शुरू कीं।

अधिकांश लोग सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपने सपनों को यहीं विराम दे देते हैं, लेकिन वसीम अकरम का सपना इससे कहीं बड़ा था।

उन्होंने नौकरी को अपनी मंजिल नहीं, बल्कि एक पड़ाव माना। रेलवे की व्यस्त नौकरी के बावजूद वे रोजाना समय निकालकर UPSC की तैयारी करते रहे। ड्यूटी खत्म होने के बाद देर रात तक पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी।

यही निरंतरता अंततः उन्हें उस मुकाम तक ले गई, जहां आज वे भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय में अधिकारी के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।


बड़े भाई की एजेंसी पर भी दिया समय

वसीम अकरम के बड़े भाई सोहराब अली तमकुहीराज में रॉयल होंडा नाम से मोटरसाइकिल एजेंसी का संचालन करते हैं।

परिवार की जिम्मेदारियों को समझते हुए वसीम अकरम समय-समय पर अपने बड़े भाई के व्यवसाय में भी सहयोग करते रहे। नौकरी, परिवार और पढ़ाई—इन तीनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

उनके बड़े भाई बताते हैं कि जब भी उन्हें अवसर मिलता, वे एजेंसी पर आकर काम में हाथ बंटाते थे और खाली समय में फिर अपनी पढ़ाई में जुट जाते थे।


शादी के प्रस्ताव भी ठुकराए, लक्ष्य से नहीं हटे

वसीम अकरम की सफलता की कहानी का एक और प्रेरणादायक पहलू सामने आया।

उनके बड़े भाई के अनुसार पिछले पांच से सात वर्षों के दौरान परिवार के पास शादी के कई प्रस्ताव आए। परिवार चाहता था कि नौकरी के साथ उनका विवाह भी हो जाए।

लेकिन वसीम अकरम का ध्यान पूरी तरह अपने लक्ष्य पर था। उन्होंने परिवार से साफ कहा कि पहले अपने सपनों को पूरा करेंगे, उसके बाद जीवन के अन्य फैसले लेंगे।

यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

आज उनकी सफलता यह साबित करती है कि जब व्यक्ति पूरी ईमानदारी से अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित रहता है, तो सफलता उसके कदम जरूर चूमती है।


सेल्फ स्टडी के साथ RCA जामिया का मिला मार्गदर्शन

वसीम अकरम की तैयारी का सबसे मजबूत आधार सेल्फ स्टडी रही।

उन्होंने अधिकांश समय स्वयं पढ़ाई की और अपने विषयों पर गहरी पकड़ बनाई। बाद में उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रतिष्ठित रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (RCA) में भी प्रवेश लिया।

RCA देश के उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल है जहां प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।

सेल्फ स्टडी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के इस संतुलन ने उनकी तैयारी को नई दिशा दी और अंततः वे UPSC की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने में सफल रहे।


रेलवे की नौकरी के साथ तैयारी आसान नहीं थी

UPSC जैसी परीक्षा की तैयारी पूर्णकालिक छात्रों के लिए भी कठिन मानी जाती है।

ऐसे में रेलवे जैसी जिम्मेदारी वाली नौकरी के साथ तैयारी करना और सफलता हासिल करना असाधारण उपलब्धि है।

वसीम अकरम ने अपनी सफलता से यह संदेश दिया कि यदि समय का सही प्रबंधन किया जाए, तो नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी साथ-साथ संभव है।

उन्होंने अपने हर दिन का एक निश्चित कार्यक्रम बनाया। नौकरी के बाद नियमित अध्ययन, अखबार पढ़ना, नोट्स तैयार करना और मॉक टेस्ट देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।


परिवार की दुआ और सहयोग बना सबसे बड़ी ताकत

वसीम अकरम अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई को देते हैं।

उनके अनुसार यदि परिवार का विश्वास और सहयोग नहीं मिलता, तो इस कठिन सफर को पूरा करना संभव नहीं था।

माता-पिता ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि बड़े भाई ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया।

यही कारण है कि आज पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।


कुशीनगर में खुशी की लहर

जैसे ही वसीम अकरम के चयन की खबर सामने आई, पूरे पिपरा अग्रवाल, तमकुहीराज और कुशीनगर में खुशी का माहौल बन गया।

रिश्तेदार, मित्र, शिक्षक और स्थानीय लोग लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी उनकी सफलता की चर्चा हो रही है। लोग इसे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बता रहे हैं।


युवाओं के लिए बड़ा संदेश

वसीम अकरम की कहानी केवल UPSC पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी है।

उन्होंने दिखाया कि—

  • सरकारी नौकरी अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत भी हो सकती है।
  • सीमित संसाधन कभी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते।
  • परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास सबसे बड़ी पूंजी है।
  • सेल्फ स्टडी और सही रणनीति से बड़ी से बड़ी परीक्षा जीती जा सकती है।
  • लक्ष्य स्पष्ट हो तो हर कठिनाई छोटी पड़ जाती है।

निष्कर्ष

कुशीनगर के वसीम अकरम ने भारतीय रेलवे में सेवा देते हुए जिस तरह UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स में असिस्टेंट डायरेक्टर (जिला युवा अधिकारी) का पद प्राप्त किया है, वह हर युवा के लिए प्रेरणा है।

उनकी कहानी बताती है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सीमित समय के बावजूद यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।

NAYAK भारतीय नायक परिवार की ओर से वसीम अकरम को इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं। हमें विश्वास है कि वे अपने कार्यों से देश, समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

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