महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में आदिवासी छात्राओं के लिए चल रहे एक आवासीय स्कूल से सामने आई घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जपतलाई गांव स्थित आश्रम स्कूल के छात्रावास में 10 अगस्त की रात जमीन पर सो रही छह छात्राओं को जहरीले सांप ने काट लिया। इनमें से तीन बच्चियों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य का इलाज चल रहा है।
यह हादसा सिर्फ एक सांप के छात्रावास में घुस आने की कहानी नहीं है। इसके पीछे वे सवाल भी हैं, जिनका सामना देश के कई दूरदराज और आदिवासी इलाकों में रहने वाले बच्चों को रोज करना पड़ता है—क्या उन्हें सुरक्षित रहने और पढ़ने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं?
जमीन पर सो रही थीं छात्राएं
रिपोर्टों के मुताबिक, धानोरा तालुका के जपतलाई गांव में स्थित इस सरकारी सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में पर्याप्त बिस्तरों की कमी थी। छात्राएं जमीन पर चटाई बिछाकर सो रही थीं। इसी दौरान रात में सांप ने छह छात्राओं को काट लिया। मृत छात्राओं की उम्र 8, 12 और 14 वर्ष बताई गई है।
घटना के बाद छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। तीन बच्चियों की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि अन्य छात्राओं का इलाज किया गया। एक गंभीर रूप से बीमार छात्रा को बेहतर उपचार के लिए नागपुर ले जाने की जानकारी भी सामने आई है।
बिस्तर की कमी पहले से थी सवालों में
इस घटना का सबसे परेशान करने वाला पहलू यह है कि छात्रावास में बिस्तरों की कमी को लेकर पहले भी सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। एक शिक्षक के अनुसार, स्कूल प्रबंधन के सामने इस समस्या को उठाया गया था और कथित तौर पर बाद में बिस्तर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बच्चों के लिए बिस्तर जैसी बुनियादी सुविधा समय पर उपलब्ध होती, तो क्या यह हादसा टाला जा सकता था?
इसका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन यह सवाल अब पूरे महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं की व्यवस्था पर जरूर खड़ा हो गया है।
सरकार ने स्कूल पर की कार्रवाई
घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित स्कूल की मान्यता/लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का आदेश दिया है। प्रशासन ने स्कूल में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों की जांच भी शुरू की है।
सरकार ने राज्य के आदिवासी आवासीय स्कूलों का तीसरे पक्ष से ऑडिट कराने और व्यवस्थाओं का व्यापक सत्यापन कराने की बात भी कही है। मृत छात्राओं के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।
सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं
गढ़चिरौली की यह घटना हमें याद दिलाती है कि शिक्षा केवल स्कूल की इमारत और किताबों तक सीमित नहीं है। जब बच्चे घर से दूर किसी आवासीय स्कूल में रहते हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।
उन्हें सुरक्षित भवन, पर्याप्त बिस्तर, प्रशिक्षित स्टाफ, रात में निगरानी, स्वास्थ्य सुविधा और आपात स्थिति में तेज चिकित्सा सहायता मिलना जरूरी है।
NAYAK — भारतीय नायक के लिए इस घटना का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हमारे आदिवासी बच्चों को वही सुरक्षा और सुविधाएं मिल रही हैं, जिनका अधिकार देश के हर बच्चे को है?
क्योंकि तीन बच्चियों की मौत को सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा कहकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी यह है कि जांच से सच्चाई सामने आए, जिम्मेदारी तय हो और ऐसी घटना दोबारा न हो।
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