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ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई: छह दिनों तक चलेगा राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम, भारत से पहुंचे सर्वधर्म प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि


NAYAK भारतीय नायक | अंतरराष्ट्रीय विशेष रिपोर्ट

तेहरान/मशहद: ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है। ईरानी प्रशासन ने उनके सम्मान में छह दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम की घोषणा की है। यह कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई को पवित्र शहर मशहद में उनके सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के साथ संपन्न होगा। मशहद को विशेष महत्व इसलिए भी प्राप्त है क्योंकि इसे अयातुल्ला खामेनेई का पैतृक शहर माना जाता है।

इस दौरान देशभर से लाखों लोगों के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। ईरानी प्रशासन ने राजधानी तेहरान से लेकर मशहद तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।


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तेहरान में उमड़ा जनसैलाब

शुक्रवार को अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कई दिवंगत सदस्यों के पार्थिव शरीर को तेहरान स्थित इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया।

सुबह से ही हजारों लोग मस्जिद परिसर के बाहर एकत्र होने लगे। धीरे-धीरे श्रद्धांजलि देने वालों की संख्या लाखों तक पहुंचने की संभावना जताई गई। लोग हाथों में ईरानी झंडे, धार्मिक प्रतीक और श्रद्धांजलि संदेश लेकर पहुंचे तथा दिवंगत नेता के सम्मान में प्रार्थनाएं कीं।

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार देश के विभिन्न प्रांतों से भी बड़ी संख्या में नागरिक विशेष वाहनों और ट्रेनों के माध्यम से तेहरान पहुंचे।


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छह दिनों तक चलेगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम

ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार कार्यक्रम को कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं—

तेहरान में सार्वजनिक अंतिम दर्शन।

राष्ट्रीय स्तर पर शोक सभाएं।

विभिन्न प्रांतों में विशेष प्रार्थना सभाएं।

धार्मिक विद्वानों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सहभागिता।

अंत में मशहद में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक।


प्रशासन का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।


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मशहद क्यों है खास?

मशहद ईरान के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक शहरों में गिना जाता है। यहां स्थित इमाम रज़ा का पवित्र दरगाह विश्वभर के शिया मुसलमानों के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है।

अयातुल्ला खामेनेई का जन्म भी मशहद में हुआ था। इसलिए उनके अंतिम संस्कार के लिए इसी शहर को चुना गया है। माना जा रहा है कि अंतिम यात्रा में देशभर के अलावा कई अन्य देशों से भी प्रतिनिधिमंडल शामिल हो सकते हैं।


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भारत से पहुंचा सर्वधर्म प्रतिनिधिमंडल

अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत से पहुंचे विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही।

भारत स्थित ईरानी दूतावास द्वारा साझा की गई तस्वीरों में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के प्रतिनिधि तेहरान पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते दिखाई दिए।

ईरानी दूतावास ने इसे भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संवाद का प्रतीक बताया।

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भारतीय राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भारत के कुछ राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

रिपोर्टों के अनुसार—

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद


ने भी तेहरान पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इनकी मौजूदगी को भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।


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दुनिया भर की नजरें ईरान पर

अयातुल्ला खामेनेई लंबे समय तक ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का सामना किया।

उनके निधन के बाद विश्व समुदाय की निगाहें अब ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में देश के नेतृत्व और नीतिगत दिशा को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।


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सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

ईरानी प्रशासन ने राजधानी तेहरान और मशहद सहित प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है।

बताया जा रहा है कि—

संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है।

विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए अलग प्रोटोकॉल लागू किया गया है।



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सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया

अंतिम संस्कार कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं।

दुनिया के कई देशों के लोग श्रद्धांजलि संदेश पोस्ट कर रहे हैं, जबकि अनेक विश्लेषक उनके राजनीतिक और धार्मिक योगदान पर चर्चा कर रहे हैं।


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भारत-ईरान संबंधों के संदर्भ में महत्व

भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध लंबे समय से रहे हैं।

ऊर्जा सहयोग, चाबहार बंदरगाह परियोजना, क्षेत्रीय कूटनीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के रिश्तों के महत्वपूर्ण आधार रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के नेतृत्व में होने वाले भविष्य के बदलावों का प्रभाव क्षेत्रीय राजनीति और भारत-ईरान संबंधों पर भी पड़ सकता है।


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आगे क्या?

अब सबसे बड़ी निगाहें 9 जुलाई को होने वाले अंतिम संस्कार पर हैं, जहां लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

इसके साथ ही ईरान की संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया के तहत आगे की नेतृत्व व्यवस्था को लेकर भी देश और दुनिया की नजरें बनी हुई हैं।


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निष्कर्ष

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम ने केवल ईरान ही नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। छह दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम में लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। भारत से पहुंचे विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, सामाजिक हस्तियों और राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति ने भी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान किया है।

ईरान में आगे की राजनीतिक और धार्मिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर नजर बनी रहेगी।

(अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा भविष्य में कोई नई आधिकारिक जानकारी जारी की जाती है, तो उसके अनुसार तथ्यों में परिवर्तन संभव है।)

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