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MP कांग्रेस प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने उठाया भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 का मुद्दा, यात्रियों की बदहाल सुविधाओं पर सरकार से मांगा जवाब


भोपाल | विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। हर दिन हजारों यात्री यहां से सफर करते हैं और बड़ी संख्या में ट्रेनें इस स्टेशन से होकर गुजरती हैं। भारतीय रेलवे लगातार स्टेशनों के आधुनिकीकरण, अमृत भारत स्टेशन योजना और विश्वस्तरीय सुविधाओं के दावे कर रही है। इसी बीच भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर यात्रियों को होने वाली समस्याओं को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।

इस मुद्दे को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने प्लेटफॉर्म नंबर-6 से बाहर निकलने वाले यात्रियों को हो रही परेशानियों का उल्लेख करते हुए रेलवे प्रशासन और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर यात्रियों की परेशानी बनी बड़ा मुद्दा

प्रवीण धौलपुरे के अनुसार, प्लेटफॉर्म नंबर-6 से बाहर निकलने वाले यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है। उनका दावा है कि ऑटो स्टैंड स्टेशन के निकास द्वार से लगभग 250 से 300 मीटर दूर स्थित है, जिसके कारण यात्रियों को भारी सामान लेकर पैदल चलना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में भी यह दूरी यात्रियों के लिए असुविधाजनक होती है, लेकिन बारिश के मौसम में यह समस्या कई गुना बढ़ जाती है। पानी भरने, कीचड़ और फिसलन के कारण यात्रियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इस व्यवस्था का सबसे अधिक असर बुजुर्ग नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों, बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कई यात्री लंबे सफर के बाद भारी सूटकेस और बैग लेकर स्टेशन से बाहर निकलते हैं। ऐसे में यदि उन्हें 250 से 300 मीटर तक पैदल चलना पड़े तो यह उनके लिए शारीरिक और मानसिक दोनों दृष्टि से कठिन हो जाता है।

धौलपुरे का कहना है कि राजधानी के रेलवे स्टेशन पर ऐसी स्थिति यात्रियों की गरिमा और सुविधा के अनुरूप नहीं कही जा सकती।

बारिश के मौसम ने बढ़ाई मुश्किलें

मौजूदा मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रवीण धौलपुरे का कहना है कि स्टेशन के बाहर कई स्थानों पर जलभराव की समस्या बनी रहती है।
उनके अनुसार, हमीदिया रोड की ओर निकलते ही कई जगह पानी जमा हो जाता है। यात्रियों को सामान लेकर पानी और कीचड़ के बीच पैदल चलना पड़ता है। इससे फिसलने और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई बुजुर्ग या मरीज इस मार्ग से गुजरता है तो उसके लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

मेट्रो निर्माण कार्य का भी असर

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि स्टेशन परिसर के आसपास मेट्रो परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है और यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य और उचित यातायात प्रबंधन के अभाव में प्लेटफॉर्म नंबर-6 से बाहर निकलने वाले यात्रियों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

"यह केवल ऑटो स्टैंड का नहीं, यात्रियों के सम्मान का मुद्दा"

प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि यह विवाद केवल ऑटो स्टैंड की दूरी का नहीं है बल्कि यात्रियों के सम्मान और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि सरकार लगातार रेलवे के आधुनिकीकरण और विकास की बात करती है, लेकिन यदि यात्रियों को स्टेशन से बाहर निकलने के बाद परिवहन की मूलभूत सुविधा भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उनके अनुसार किसी भी रेलवे स्टेशन की गुणवत्ता केवल आधुनिक भवन, आकर्षक डिज़ाइन या बड़े उद्घाटनों से तय नहीं होती, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली वास्तविक सुविधाओं से होती है।

सरकार पर लगाए सवाल

प्रवीण धौलपुरे ने अपने बयान में कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी करती है और रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यात्रियों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने कहा कि यदि राजधानी के रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो अन्य स्थानों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रचार से अधिक प्राथमिकता यात्रियों की सुविधाओं को दी जानी चाहिए।

सरकार और रेलवे प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने रेल मंत्री, रेलवे प्रशासन और स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए तीन प्रमुख सुझाव दिए हैं।

पहली मांग यह है कि प्लेटफॉर्म नंबर-6 के प्रवेश द्वार के निकट कम से कम 25 ऑटो के स्थायी स्टैंड की अनुमति दी जाए, ताकि यात्रियों को दूर तक पैदल न चलना पड़े।

दूसरी मांग यह है कि प्लेटफॉर्म नंबर-6 तक यात्रियों के लिए अधिकृत पिक-अप और ड्रॉप की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

तीसरी मांग यह है कि बारिश के मौसम को देखते हुए तत्काल प्रभाव से आवश्यक प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएं और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे यात्रियों को जलभराव और लंबी पैदल दूरी जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
कई जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की अपील

प्रवीण धौलपुरे ने अपनी मांग रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, डीआरएम भोपाल, भोपाल सांसद, महापौर, जिला प्रशासन, नरेला विधायक विश्वास सारंग तथा रेलवे के अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखी है।

उन्होंने कहा कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है और इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए।

रेलवे के आधुनिकीकरण पर विपक्ष के सवाल

भारतीय रेलवे वर्तमान में देशभर के अनेक स्टेशनों के पुनर्विकास पर कार्य कर रही है। सरकार का कहना है कि स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाया जा रहा है।

हालांकि विपक्ष का आरोप है कि कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी बनी हुई है। कांग्रेस का कहना है कि आधुनिकीकरण का वास्तविक अर्थ केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञों की राय

शहरी परिवहन और सार्वजनिक अवसंरचना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्टेशन के बाहर सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था सुव्यवस्थित नहीं होगी, तो स्टेशन की अन्य आधुनिक सुविधाओं का लाभ भी यात्रियों को पूरी तरह नहीं मिल पाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार सीमित संख्या में अधिकृत ऑटो स्टैंड, बेहतर जलनिकासी, स्पष्ट संकेतक, सुरक्षित पैदल मार्ग और बुजुर्ग एवं दिव्यांग यात्रियों के लिए बैटरी चालित वाहन जैसी सुविधाएं इस समस्या का व्यावहारिक समाधान हो सकती हैं।

रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में रेलवे प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रवीण धौलपुरे द्वारा लगाए गए आरोपों और मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यदि रेलवे प्रशासन इस विषय पर कोई स्पष्टीकरण जारी करता है या यात्रियों की सुविधा के लिए कोई नई व्यवस्था लागू करता है, तो उससे स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

यात्रियों की अपेक्षा

यात्रियों का मानना है कि राजधानी के रेलवे स्टेशन पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे स्टेशन से बाहर निकलते ही उन्हें आसानी से ऑटो, टैक्सी या अन्य सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सके। साथ ही बारिश के दौरान जलभराव और अव्यवस्थित पैदल मार्ग जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान भी किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर यात्रियों की सुविधाओं को लेकर उठाया गया यह मुद्दा अब राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने इसे प्रमुखता से उठाते हुए सरकार और रेलवे प्रशासन से जवाब मांगा है तथा यात्रियों के हित में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

दूसरी ओर, इस विषय पर रेलवे प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष तस्वीर प्रशासनिक पक्ष आने के बाद और स्पष्ट होगी। यदि वास्तव में यात्रियों को लंबी पैदल दूरी, जलभराव, परिवहन सुविधा की कमी और बारिश के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो संबंधित एजेंसियों द्वारा समयबद्ध कार्रवाई करना सार्वजनिक हित और यात्री सुविधा—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होगा।

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