नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड का आध्यात्मिक और पर्यटन नगरी ऋषिकेश एक बार फिर चर्चा में है। गंगा नदी पर बने प्रसिद्ध बजरंग सेतु के ग्लास स्काईवॉक (कांच वाले पुल) पर अब पर्यटकों को मुफ्त प्रवेश नहीं मिलेगा। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर ली है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पर्यटकों से प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य स्काईवॉक की नियमित देखरेख, सुरक्षा और साफ-सफाई सुनिश्चित करना बताया गया है।
क्या है बजरंग सेतु का ग्लास स्काईवॉक?
ऋषिकेश में गंगा नदी के ऊपर बना बजरंग सेतु पहले ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन चुका है। हाल ही में पुल पर पारदर्शी कांच से बना ग्लास स्काईवॉक तैयार किया गया, जहां खड़े होकर लोग नीचे बहती गंगा का अद्भुत दृश्य देख सकते हैं। पारदर्शी फर्श पर चलने का रोमांच देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
इसी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब सरकार ने इसके संचालन को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया है।
कितनी होगी एंट्री फीस?
नई व्यवस्था के अनुसार—
- वयस्कों के लिए शुल्क: ₹100 प्रति व्यक्ति
- बच्चों के लिए शुल्क: ₹50 प्रति व्यक्ति
- समय सीमा: टिकट दो घंटे तक वैध रहेगा।
यह शुल्क केवल ग्लास स्काईवॉक क्षेत्र में प्रवेश के लिए होगा। पुल के सामान्य रास्ते से आने-जाने वाले लोगों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्काईवॉक कब तक रहेगा खुला?
पीडब्ल्यूडी की तैयार एसओपी के मुताबिक—
- सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक ही ग्लास स्काईवॉक पर पर्यटकों को प्रवेश मिलेगा।
- जबकि बजरंग सेतु का सामान्य मार्ग 24 घंटे आम लोगों और श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा।
यानी स्थानीय लोगों की आवाजाही पहले की तरह जारी रहेगी, जबकि रोमांचक ग्लास वॉक का अनुभव लेने वालों को निर्धारित समय और टिकट व्यवस्था का पालन करना होगा।
सरकार ने शुल्क लगाने की जरूरत क्यों बताई?
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि ग्लास स्काईवॉक जैसी आधुनिक संरचना की नियमित सफाई और तकनीकी देखरेख बेहद जरूरी है। कांच की सतह को सुरक्षित रखने, समय-समय पर निरीक्षण कराने, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और रखरखाव पर लगातार खर्च आता है।
इसी वजह से प्रवेश शुल्क से मिलने वाली आय का उपयोग—
- ग्लास पैनलों की नियमित सफाई,
- सुरक्षा व्यवस्था,
- तकनीकी निरीक्षण,
- मरम्मत कार्य,
- पर्यटक सुविधाओं के विस्तार
जैसे कार्यों में किया जाएगा।
जल्द शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
सरकारी मंजूरी मिलने के बाद अब विभाग जल्द ही निजी एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जारी करेगा। यही एजेंसी टिकट व्यवस्था, संचालन और रखरखाव का जिम्मा संभालेगी। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में पूरी प्रक्रिया डिजिटल भी की जा सकती है, जिससे ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध हो सके।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
उत्तराखंड सरकार लगातार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। ऋषिकेश पहले से ही योग, अध्यात्म, रिवर राफ्टिंग और धार्मिक स्थलों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
अब ग्लास स्काईवॉक जैसी आधुनिक सुविधा युवाओं, परिवारों और विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसका संचालन व्यवस्थित ढंग से किया गया तो यह ऋषिकेश की पहचान को और मजबूत करेगा।
पर्यटकों की क्या है राय?
नई व्यवस्था को लेकर पर्यटकों की राय मिश्रित दिखाई दे रही है। कई लोगों का मानना है कि यदि शुल्क के बदले बेहतर सुरक्षा, साफ-सफाई और सुव्यवस्थित व्यवस्था मिलती है तो यह उचित कदम है।
वहीं कुछ पर्यटकों का कहना है कि धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त शुल्क आम लोगों के लिए बोझ बन सकता है। हालांकि अधिकांश लोगों का मानना है कि टिकट राशि बहुत अधिक नहीं है और इससे सुविधा बेहतर होगी।
स्थानीय कारोबारियों को भी होगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि स्काईवॉक पर आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने से आसपास के होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, स्थानीय दुकानदार, टैक्सी संचालक और हस्तशिल्प व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलेगा।
यदि टिकट प्रणाली व्यवस्थित रही तो पर्यटकों की आवाजाही नियंत्रित रहेगी और भीड़ प्रबंधन भी आसान होगा।
सुरक्षा होगी प्राथमिकता
ग्लास स्काईवॉक पर एक समय में सीमित संख्या में लोगों को प्रवेश देने की संभावना भी जताई जा रही है। इससे संरचना पर अनावश्यक भार नहीं पड़ेगा और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
साथ ही सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और आपातकालीन सहायता जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
क्या बदल जाएगा आम लोगों के लिए?
यह समझना जरूरी है कि शुल्क केवल ग्लास स्काईवॉक के लिए होगा। यदि कोई व्यक्ति सिर्फ बजरंग सेतु से होकर सामान्य रूप से गुजरना चाहता है तो उसके लिए कोई टिकट नहीं लगेगा। यानी स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की रोजमर्रा की आवाजाही पहले की तरह जारी रहेगी।
निष्कर्ष
ऋषिकेश का बजरंग सेतु अब केवल धार्मिक महत्व का स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक पर्यटन का भी प्रमुख आकर्षण बनता जा रहा है। ग्लास स्काईवॉक के लिए ₹100 और ₹50 की टिकट व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि इस अनोखी संरचना की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित करना है। यदि सरकार पारदर्शी और सुविधाजनक संचालन व्यवस्था लागू करती है तो यह पहल उत्तराखंड के पर्यटन मॉडल के लिए एक नई मिसाल बन सकती है।
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