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हरियाणा: दूषित पानी से जूझ रहा चनौत गांव, स्वच्छ पेयजल की मांग को लेकर 16 मई से आंदोलन जारी

Khalid Siddiqui | विशेष रिपोर्ट
हांसी (हरियाणा): हरियाणा के हांसी जिले का चनौत गांव इन दिनों स्वच्छ पेयजल की मांग को लेकर चर्चा में है। गांव के लोगों का कहना है कि उनके घरों तक पहुंचने वाला पानी इतना दूषित है कि उसे पीना तो दूर, देखकर ही उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से इस समस्या की शिकायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। इसी कारण ग्रामीणों ने 16 मई से लगातार आंदोलन शुरू कर रखा है और सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, बच्चों के भविष्य और गांव के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उनका आरोप है कि स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से आज भी उनका गांव वंचित है।

"बच्चे भी मजबूरी में यही पानी पी रहे हैं"
गांव की निवासी नवीन देवी का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि कई बार नलों से आने वाले पानी का रंग और गुणवत्ता देखकर उसे पीने का मन नहीं करता। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी है, वे बाजार से पानी खरीद लेते हैं या टैंकर मंगवा लेते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे परिवारों के छोटे-छोटे बच्चे भी मजबूरी में यही पानी पी रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण कई बार पेट संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आती हैं। हालांकि, इन बीमारियों के संबंध में आधिकारिक स्वास्थ्य आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि खराब पानी का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।

लंबे समय से उठ रही है मांग
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने कई बार संबंधित विभाग, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। ज्ञापन भी दिए गए और कई बार अधिकारियों से गांव का दौरा करने की मांग की गई, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।

जब लगातार शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही, तब ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

क्या है ग्रामीणों की मुख्य मांग?
ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है कि केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत राजली स्थित भाखड़ा नहर से हांसी शहर तक बिछाई जा रही 36 इंच व्यास की पाइपलाइन से उनके गांव को भी जोड़ा जाए।

इसके लिए ग्रामीण केवल एक 'टी-कनेक्शन' की मांग कर रहे हैं। टी-कनेक्शन का अर्थ है कि मुख्य पाइपलाइन से एक अतिरिक्त जोड़ देकर गांव तक पानी पहुंचाया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह सुविधा मिल जाती है, तो उनके गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

गांव के पास से गुजर रही है पाइपलाइन
जानकारी के अनुसार अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत राजली स्थित भाखड़ा नहर से हांसी शहर तक लगभग 27 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। यह पाइपलाइन चनौत गांव के पास से होकर गुजरती है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब इतनी बड़ी परियोजना उनके गांव के बिल्कुल निकट से गुजर रही है, तब गांव को इससे जोड़ने में कोई बड़ी तकनीकी कठिनाई नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि गांव को इसी लाइन से पानी मिलने लगे, तो भविष्य में पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति दोनों बेहतर हो सकती हैं।
बड़ी पाइपलाइन से बेहतर होगी निगरानी
ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी पाइपलाइन होने के कारण उसकी नियमित निगरानी और रखरखाव बेहतर तरीके से किया जाएगा। साथ ही अवैध कनेक्शन या पानी की चोरी जैसी समस्याओं की संभावना भी कम होगी।

उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार पाइपलाइन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। नई पाइपलाइन से जुड़ने पर ऐसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।

गरीब परिवारों पर सबसे अधिक असर
गांव में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। जो लोग रोज कमाकर अपना घर चलाते हैं, उनके लिए रोजाना पीने का पानी खरीदना संभव नहीं है।

कई परिवारों को मजबूरी में वही पानी पीना पड़ रहा है जो नलों के माध्यम से उपलब्ध हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ पानी हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए।

महिलाओं को उठानी पड़ रही अतिरिक्त जिम्मेदारी
ग्रामीणों के अनुसार घरों में सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है। पीने योग्य पानी की तलाश में उन्हें कई बार दूर-दूर तक जाना पड़ता है या फिर पानी खरीदने की व्यवस्था करनी पड़ती है। इससे समय और आर्थिक दोनों तरह का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

आंदोलन में बढ़ रही ग्रामीणों की भागीदारी
16 मई से शुरू हुआ आंदोलन अब गांव के अधिकांश लोगों का जनआंदोलन बन चुका है। ग्रामीण एकजुट होकर प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे केवल अपनी मूलभूत आवश्यकता के लिए आवाज उठा रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।
स्वच्छ पानी क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार स्वच्छ पेयजल किसी भी समाज के स्वस्थ विकास की बुनियादी आवश्यकता है। दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण, डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय पर सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है।

ग्रामीणों की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेते हैं, तो हजारों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। उनका विश्वास है कि भाखड़ा पाइपलाइन से टी-कनेक्शन मिलने के बाद गांव की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या समाप्त हो सकती है।

प्रशासन से समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द तकनीकी सर्वे कराकर गांव को नई पाइपलाइन से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है।

जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक ग्रामीण आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

(संपादकीय नोट – NAYAK Bhartiya Nayak)
यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और ग्रामीणों के बयानों पर आधारित है। यदि इस मामले में संबंधित विभाग या प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने पूरी और संतुलित जानकारी प्रस्तुत की जा सके।

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