नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी सशस्त्र बलों में शामिल भारतीय नागरिकों को लेकर केंद्र सरकार ने अब तक का गंभीर आंकड़ा सामने रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 31 अगस्त 2026 को बताया कि भारत को 227 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने की जानकारी मिली है। इनमें से 139 लोगों को सेना से डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 51 की मौत हो चुकी है।
यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के दौरान बिश्केक में विदेश मंत्रालय की विशेष ब्रीफिंग में सामने आई। मिसरी ने कहा कि भारतीय नागरिकों की रूसी सैन्य सेवा से रिहाई और उनकी स्वदेश वापसी का मुद्दा भारत लगातार रूस के सामने उठाता रहा है।
51 भारतीयों की मौत ने बढ़ाई चिंता
227 भारतीय नागरिकों के आंकड़े में से 51 लोगों की मौत की पुष्टि होना इस पूरे मामले की गंभीरता को सामने रखता है। उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से 139 लोग रूसी सेना से बाहर आ चुके हैं। इस गणना के आधार पर 37 लोगों की स्थिति बाकी श्रेणी में आती है, हालांकि सरकार ने अपने बयान में इस समूह की विस्तृत स्थिति अलग से स्पष्ट नहीं की है।
विदेश सचिव ने कहा कि भारत रूस के साथ लगातार बातचीत कर रहा है और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास संबंधित मामलों की नियमित निगरानी कर रहा है। सरकार का उद्देश्य बाकी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द रूसी सैन्य सेवा से मुक्त कराकर उनके परिवारों तक वापस पहुंचाना है।
आखिर भारतीय रूसी सेना तक पहुंचे कैसे?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कई भारतीय परिवारों ने आरोप लगाया था कि उनके परिजनों को रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर ऐसे एजेंटों के जरिए भेजा गया, जिन्होंने उन्हें सैन्य गतिविधियों से जुड़ी वास्तविक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी।
विदेश मंत्रालय पहले भी भारतीयों को रूस में जोखिम भरे रोजगार प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह देता रहा है। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं और किसी भी व्यक्ति के रूसी सैन्य ढांचे में शामिल होने के पीछे की परिस्थितियों की जांच अलग-अलग मामले में की जानी जरूरी है।
भारत सरकार ने इस मुद्दे को रूस के साथ विभिन्न स्तरों पर उठाने की बात कही है। यह मामला केवल विदेश नीति का विषय नहीं, बल्कि उन परिवारों की चिंता से भी जुड़ा है जिनके सदस्य युद्ध क्षेत्र में फंस गए या वापस नहीं लौट सके।
सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है हस्तक्षेप
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। अदालत ने मृत या घायल भारतीयों के परिवारों के साथ समन्वय, शवों की पहचान के लिए DNA प्रक्रिया और मुआवजे से जुड़े दस्तावेजों में सहायता जैसे कदमों पर भी निर्देश दिए थे।
इससे स्पष्ट है कि मामला सिर्फ विदेशों में रोजगार का नहीं रह गया है। इसके साथ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, मानव तस्करी या धोखाधड़ी की आशंका, परिवारों को समय पर जानकारी और मृतकों के पार्थिव अवशेषों की वापसी जैसे गंभीर सवाल जुड़े हैं।
मोदी-पुतिन मुलाकात के बीच सामने आया आंकड़ा
विदेश सचिव का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखते हैं, लेकिन विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का सवाल इस रिश्ते का एक संवेदनशील पहलू है।
227 भारतीयों का रूसी सेना में पहुंचना, 139 का वापस आना और 51 लोगों की मौत—ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। इनके पीछे परिवारों की उम्मीद, इंतजार और कई मामलों में अपनों को खोने का दर्द जुड़ा है। अब सबसे बड़ी जरूरत यही है कि बाकी भारतीयों की स्थिति जल्द स्पष्ट हो और जो लोग अभी भी वहां हैं, उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए।
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रूसी सेना में 227 भारतीयों की भर्ती, 51 की मौत; विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया पूरा आंकड़ा
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच 227 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के मुताबिक 139 डिस्चार्ज और 51 की मौत हुई है।
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