नायक भारतीय नायक | नई दिल्ली/भुवनेश्वर
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जुएल ओराम के एक बयान ने ओडिशा की राजनीति से लेकर भाजपा के अंदरूनी समीकरणों तक चर्चा तेज कर दी है। ओराम ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग उनकी राजनीतिक छवि खराब करने और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटवाने के लिए सुनियोजित अभियान चला रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इस कथित साजिश के पीछे उन लोगों की ओर इशारा किया है, जो दूसरी राजनीतिक पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए हैं। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया।
ओराम का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब उनके एक सहयोगी राकेश पासवान की ओडिशा के राउरकेला में गिरफ्तारी को लेकर विवाद चल रहा है। पासवान पर सरकारी गेस्ट हाउस में कथित तौर पर अपराधियों को पनाह देने से जुड़ा आरोप लगाया गया है। हालांकि, पासवान ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। ओराम पहले ही कह चुके हैं कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई बनती है तो कानून को अपना काम करना चाहिए।
कैबिनेट से हटाने की साजिश का आरोप
जुएल ओराम ने दावा किया कि कुछ लोग पैसे खर्च कर उनके खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों का उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा और राजनीतिक स्थिति को कमजोर करना है ताकि यदि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाया जाता है तो किसी दूसरे नेता के लिए मंत्री बनने का रास्ता खुल सके।
ओराम ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को भाजपा के ओडिशा संगठन के स्तर पर उठाया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि राज्य स्तर पर मामले का समाधान नहीं हुआ तो वह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने भी इसे रख सकते हैं।
बयान का सबसे विवादित हिस्सा
अपने खिलाफ कथित अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओराम ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने वालों के खिलाफ वह कड़ी कार्रवाई करने की क्षमता रखते हैं और इसी दौरान उन्होंने ‘हाथ काटने’ जैसी हिंसक चेतावनी दी। इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
एक केंद्रीय मंत्री के पद पर बैठे नेता की ओर से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल विपक्ष के निशाने पर आ गया। बीजू जनता दल और कांग्रेस ने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक राजनीति में राजनीतिक विरोध या आरोपों का जवाब हिंसक भाषा से क्यों दिया जाना चाहिए।
बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने इसे भाजपा के भीतर कथित आंतरिक संघर्ष का संकेत बताया और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से भी ओराम के बयान की आलोचना की गई और कहा गया कि देश में राजनीतिक मतभेदों का समाधान हिंसा की भाषा से नहीं होना चाहिए।
2029 चुनाव लड़ने का भी ऐलान
इस पूरे विवाद के बीच जुएल ओराम ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पहले वह 2029 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने की बात कह चुके थे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब वह चुनाव लड़ेंगे। ओराम ओडिशा के सुंदरगढ़ लोकसभा क्षेत्र से छह बार सांसद रह चुके हैं और लंबे समय से भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
सवाल अब भाजपा के भीतर की राजनीति पर
ओराम के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए उनके द्वारा लगाए गए साजिश के आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। लेकिन इतना जरूर है कि उनके बयान ने भाजपा के भीतर संभावित खींचतान और ओडिशा की राजनीति में नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मुद्दा दे दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व ओराम के बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या पार्टी स्तर पर उनके लगाए आरोपों की कोई औपचारिक जांच या कार्रवाई होती है।
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