मुंबई: अस्पताल का बिल सामने आते ही मरीज और उसके परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता अक्सर कुल रकम होती है। लेकिन उस बिल में शामिल छोटे-छोटे मेडिकल सामान की वास्तविक खरीद कीमत कितनी थी और मरीज से कितनी राशि ली गई, इसका पता आमतौर पर नहीं चल पाता। महाराष्ट्र में सामने आए एक सर्वे ने इसी अंतर को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के सर्वे में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कुछ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की खरीद कीमत और उनके MRP के बीच बहुत बड़ा अंतर पाया गया। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA से कीमतों की समीक्षा और नियामकीय कदम उठाने की मांग की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जुलाई 2026 में महाराष्ट्र FDA ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के करीब 20 अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल सामान की कीमतों का अध्ययन किया। इसमें IV इन्फ्यूजन सेट, सिरिंज, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और कैथेटर जैसे उत्पादों की खरीद कीमत की तुलना उनके छपे MRP से की गई।
सबसे ज्यादा चर्चा IV इन्फ्यूजन सेट की है। सर्वे में एक सेट की ट्रेड खरीद कीमत ₹11.05 बताई गई, जबकि उसका छपा MRP ₹325 था। FDA के अनुसार यह अंतर 2,841 प्रतिशत तक पहुंचता है। इसी तरह ₹6.75 में खरीदी गई एक सिरिंज का MRP ₹57.20 और ₹29.41 में खरीदे गए एक कैथेटर का MRP ₹310 पाया गया।
तुकाराम मुंढे ने इस अंतर को सिर्फ व्यापारिक मार्जिन का विषय नहीं माना है। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती मरीज के पास उपचार के दौरान इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान की कीमत की तुलना करने या उसके विकल्प तलाशने की सीमित गुंजाइश होती है। इसलिए खरीद कीमत और मरीज से वसूली जाने वाली कीमत के बीच पारदर्शिता का सवाल सीधे मरीजों के हित से जुड़ जाता है।
मुंढे ने 10 अगस्त को केंद्र के संबंधित विभाग और NPPA को पत्र भेजकर मेडिकल डिवाइस और सर्जिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा की मांग की। प्रस्ताव में खरीद कीमत और MRP के बीच अंतर को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियम, मार्जिन की निगरानी और आवश्यक मेडिकल सामान के लिए कीमतों की निगरानी जैसे विकल्प सुझाए गए हैं।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि हर मेडिकल डिवाइस की कीमत पर एक जैसी व्यवस्था लागू नहीं होती। NPPA के अनुसार DPCO, 2013 के तहत कई गैर-अनुसूचित उत्पादों और अधिसूचित मेडिकल डिवाइस के MRP में पिछले 12 महीनों की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की निगरानी की जाती है। वहीं कुछ निर्धारित मेडिकल डिवाइस सीधे मूल्य नियंत्रण के दायरे में आते हैं।
अब निगाह NPPA की जांच पर है। असली सवाल केवल यह नहीं कि कोई मेडिकल सामान कितने में खरीदा गया, बल्कि यह भी है कि उसकी कीमत मरीज तक पहुंचते-पहुंचते इतनी क्यों बढ़ जाती है। इलाज के समय मरीज सबसे कमजोर स्थिति में होता है। ऐसे में अस्पताल के बिल में इस्तेमाल होने वाली हर जरूरी वस्तु की कीमत पारदर्शी और समझने योग्य होना स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसे के लिए बेहद अहम है।
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अस्पतालों में मेडिकल सामान की कीमतों पर सवाल, ₹11.05 का IV सेट ₹325 में; तुकाराम मुंढे ने मांगी समीक्षा
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महाराष्ट्र FDA सर्वे में मेडिकल कंज्यूमेबल्स की खरीद कीमत और MRP में बड़ा अंतर सामने आया। तुकाराम मुंढे ने NPPA से कीमतों की समीक्षा की मांग की।
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