नई दिल्ली: पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण यानी E20 पेट्रोल को लेकर बहस अब सिर्फ गाड़ियों के माइलेज और इंजन तक सीमित नहीं रह गई है। पिछले कुछ दिनों में अंडों की बढ़ती कीमतों को भी इथेनॉल नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वजह है मक्का, जो एक तरफ इथेनॉल बनाने के काम आ रहा है और दूसरी तरफ मुर्गियों के चारे यानी पोल्ट्री फीड का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हाल के बाजार आंकड़ों के मुताबिक भारत में अंडों की कीमत पिछले एक साल में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ी है। कुछ बाजारों में फार्म स्तर पर कीमत लगभग 7 रुपये प्रति अंडे तक पहुंची है, जबकि खुदरा बाजार में यह करीब 8.50 से 9 रुपये के आसपास बताई जा रही है।
यहीं से E20 और अंडे के बीच कनेक्शन समझना जरूरी हो जाता है।
मक्का है इस पूरी कहानी की अहम कड़ी
मुर्गियों के लिए तैयार किए जाने वाले फीड में मक्के की बड़ी भूमिका होती है। पोल्ट्री उद्योग के लिए मक्का महंगा होने का सीधा मतलब है कि मुर्गियों को पालने की लागत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, इथेनॉल उद्योग भी मक्के का इस्तेमाल करता है। यानी एक ही फसल के लिए पोल्ट्री और ईंधन उद्योग के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने लगी है।
जब इथेनॉल बनाने वाली इकाइयां ज्यादा मक्का खरीदती हैं, तो बाजार में उपलब्ध मक्के की कीमत और आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर पोल्ट्री फीड की लागत पर आता है। फीड महंगा होने पर पोल्ट्री किसानों की उत्पादन लागत बढ़ती है और उसका असर अंततः अंडे की कीमत पर भी पड़ सकता है।
यानी मामला सीधे तौर पर यह नहीं है कि E20 पेट्रोल डालते ही अंडा महंगा हो गया, बल्कि इसके पीछे एक लंबी आर्थिक कड़ी है—इथेनॉल की मांग → मक्के की मांग → फीड की लागत → पोल्ट्री उत्पादन लागत → अंडे की कीमत।
क्या हर महंगाई के लिए E20 जिम्मेदार है?
यहां सावधानी जरूरी है। अंडे की कीमत बढ़ने की वजह केवल इथेनॉल नहीं है। पोल्ट्री बाजार में मांग, मौसम, मुर्गियों की संख्या, बीमारी, फीड के दूसरे घटकों की कीमत, उत्पादन और सप्लाई जैसे कई दूसरे कारण भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। हाल की रिपोर्टों में भी इथेनॉल के लिए मक्का इस्तेमाल बढ़ने को एक महत्वपूर्ण कारक बताया गया है, लेकिन इसे अकेला कारण नहीं माना गया है।
सर्दियों का मौसम भी अंडे की मांग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान खपत बढ़ने पर कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में अंडे की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा।
क्या अंडा 20-25 रुपये तक पहुंच जाएगा?
सोशल मीडिया और कुछ चर्चाओं में भविष्य में एक अंडे की कीमत 20 से 25 रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन फिलहाल इसे निश्चित भविष्यवाणी या स्थापित तथ्य मानना सही नहीं होगा। मौजूदा रिपोर्टों में कीमत बढ़ने के दबाव की बात जरूर है, लेकिन 20-25 रुपये प्रति अंडे का आंकड़ा कोई निश्चित बाजार अनुमान नहीं है।
सवाल सिर्फ अंडे का नहीं, नीति के संतुलन का है
E20 का उद्देश्य पेट्रोल में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। लेकिन जैसे-जैसे कृषि उपज का इस्तेमाल ईंधन और खाद्य/पशु आहार दोनों क्षेत्रों में बढ़ता है, ‘फूड बनाम फ्यूल’ का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक तरफ देश को वैकल्पिक ईंधन की जरूरत है, दूसरी तरफ आम परिवार के लिए भोजन सस्ता और उपलब्ध रहना भी उतना ही जरूरी है।
इसलिए असली सवाल यह नहीं कि E20 अच्छा है या बुरा, बल्कि यह है कि क्या ऐसी नीति बन सकती है जिसमें किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिले, इथेनॉल उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल मिले और आम आदमी की थाली में अंडा भी उसकी पहुंच से बाहर न हो।
क्योंकि पेट्रोल की टंकी भरने की कीमत बढ़े तो जेब पर असर पड़ता है, लेकिन अगर उसी नीति का असर खाने की प्लेट तक पहुंचने लगे, तो सवाल और बड़ा हो जाता है।
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E20 Petrol से महंगा हुआ अंडा? मक्के की बढ़ती मांग ने बढ़ाई पोल्ट्री की लागत, समझिए पूरा कनेक्शन
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E20 पेट्रोल और अंडे की बढ़ती कीमत के बीच क्या संबंध है? जानिए इथेनॉल, मक्का, पोल्ट्री फीड और अंडे की कीमतों के बीच पूरी आर्थिक कड़ी।
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