जालना | 28 अगस्त 2026
महाराष्ट्र के जालना से सामने आया एक मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक बराबरी और नागरिक अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एक दलित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने उसे रोककर मारपीट की, जातिसूचक गालियां दीं और उसके साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया। पुलिस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, हालांकि अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
मामला जालना के कन्हैया नगर इलाके से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक घटना मई महीने की है, लेकिन शिकायत बाद में उस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता परमेश्वर सुहास हिवाले के अनुसार, वह 23 मई को अपने 11 वर्षीय बेटे और परिचित नारायण मारोती कांबले के साथ देऊलगांव राजा के साप्ताहिक पशु बाजार से एक बैल खरीदकर जालना लौट रहे थे।
बैल खरीदने के बाद रास्ते में रोकने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, रास्ते में एक समूह ने उनका वाहन रोक लिया। आरोप है कि समूह के कुछ लोगों ने खुद को बजरंग दल का सदस्य और गोरक्षक बताया और हिवाले पर आरोप लगाया कि वह खरीदे गए बैल को एक मुस्लिम कसाई को बेचने जा रहे हैं।
हिवाले ने इस आरोप से इनकार करने और बैल की खरीद से जुड़े दस्तावेज दिखाने की बात कही है। इसके बावजूद कथित तौर पर उनसे उनका नाम और जाति पूछी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और जातिसूचक अपशब्द कहे गए।
मामले का सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित तौर पर पीड़ित के मुंह में जबरन गोबर डाला गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाबालिग बेटे के साथ भी ऐसा करने की कोशिश की गई, जिसका उन्होंने विरोध किया। उनके साथ मौजूद नारायण मारोती कांबले के साथ भी कथित मारपीट और गाली-गलौज की बात सामने आई है। वाहन को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है।
वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुई शिकायत
बताया गया है कि घटना के दौरान किसी आरोपी ने कथित तौर पर मोबाइल फोन से वीडियो बनाया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस में शिकायत करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।
घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर प्रसारित होने की जानकारी मिलने के बाद हिवाले ने 21 अगस्त को जालना तहसील पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), 115(2) और 189(2) के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एक उप-विभागीय पुलिस अधिकारी को सौंपी गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम साली ने प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की है।
हालांकि, अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यही बात इस मामले को लेकर एक अहम सवाल बनकर सामने आती है कि गंभीर आरोपों और वीडियो के सामने आने के बाद जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ कथित दुर्व्यवहार का नहीं है। इसमें जाति के आधार पर कथित अपमान, कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश और भीड़ द्वारा किसी नागरिक को रोककर पूछताछ करने जैसे सवाल भी शामिल हैं। पशु संरक्षण या किसी भी सामाजिक उद्देश्य के नाम पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी नागरिकों या समूहों की नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की है।
अब नजर पुलिस जांच पर है। जांच में वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों, खरीद से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल कितनी प्रभावी होती है, यही तय करेगा कि पीड़ित को न्याय कब मिलता है।
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