नई दिल्ली | 1 जुलाई 2026
संगठित नफ़रत पर अध्ययन करने वाले संगठन Center for the Study of Organized Hate (CSOH) की एक नई रिपोर्ट "Profiting From Hate Music" ने इंटरनेट पर प्रसारित होने वाले कथित घृणा-आधारित गीतों और उनसे होने वाली कमाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसे गाने बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं जिनमें मुस्लिम समुदाय के प्रति आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि इन गीतों में मुसलमानों को "जिहादी" और "देशद्रोही" जैसे शब्दों से संबोधित किया जाता है तथा इससे समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन गीतों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बड़ी संख्या में देखा और सुना जा रहा है, जिससे विज्ञापन और अन्य माध्यमों से आर्थिक लाभ भी अर्जित किया जा रहा है। अध्ययन का आरोप है कि संबंधित प्लेटफ़ॉर्म ऐसे कंटेंट पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे इस तरह की सामग्री को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है।
हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए इन दावों पर संबंधित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों या जिन पक्षों का उल्लेख किया गया है, उनकी विस्तृत प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। इस विषय पर विभिन्न पक्षों की राय सामने आना आवश्यक है ताकि पूरे मामले की संतुलित तस्वीर सामने आ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और घृणा फैलाने वाली सामग्री के बीच स्पष्ट संतुलन बनाए रखना डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों और नियामक संस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी सामग्री से किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा या घृणा को बढ़ावा मिलता है, तो उस पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफ़ॉर्म पर प्रसारित सामग्री की जवाबदेही तथा ऑनलाइन हेट स्पीच को नियंत्रित करने को लेकर देश और दुनिया में लगातार बहस जारी है।
नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से साझा की गई एक रिपोर्ट के दावों पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख द्वारा नहीं की गई है। मामले में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
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