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बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग पर दबाव के आरोप, पत्रकारों के अकाउंट भी हुए सस्पेंड

बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग पर दबाव के आरोप, पत्रकारों के अकाउंट भी हुए सस्पेंड

बालाघाट/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा और अन्य आदिवासी बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग कर रहे स्वतंत्र पत्रकारों ने दबाव, निगरानी और जिले से बाहर निकलने के लिए मजबूर किए जाने के आरोप लगाए हैं। इसी दौरान पत्रकार मोनिका सिंह, बिंदु गुर्जर और लोकभद्र सिंह के इंस्टाग्राम अकाउंट भी अस्थायी रूप से निलंबित हुए। बाद में अकाउंट बहाल कर दिए गए, लेकिन इस घटनाक्रम ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। 

यह मामला उन गांवों से जुड़ा है, जहां बैगा और गोंड समुदाय के बीच कई बच्चों की मौतें सामने आई हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में मृत बच्चों की संख्या 30 से अधिक बताई गई है, हालांकि आधिकारिक और स्वतंत्र आंकड़ों में अंतर रहा है। सरकारी आकलनों में खसरा, मलेरिया, कुपोषण और दूसरी स्वास्थ्य जटिलताओं का उल्लेख हुआ है। सभी मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़ना अभी उचित नहीं माना गया है। 

पत्रकारों ने क्या आरोप लगाए?

द वायर और ऑल्ट न्यूज़ की रिपोर्टों के अनुसार, पत्रकारों ने बताया कि उन्होंने अगस्त के अंतिम सप्ताह से प्रभावित गांवों, अस्पतालों और परिवारों के बीच जाकर रिपोर्टिंग शुरू की थी। उनका दावा था कि स्थानीय स्तर पर सामने आ रही मौतों की संख्या और शुरुआती सरकारी आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा था। इसी अंतर की पड़ताल के लिए उन्होंने परिवारों से जानकारी जुटाई। 

पत्रकार लोकभद्र सिंह ने आरोप लगाया कि रिपोर्टिंग के दौरान उनके होटल में पुलिसकर्मी पहुंचे, उनसे अधिकारियों से मिलने के लिए कहा गया और उनके आने-जाने पर नजर रखी गई। उन्होंने सादे कपड़ों में लोगों के पीछा करने का भी दावा किया। मोनिका सिंह और बिंदु गुर्जर ने भी निगरानी और दबाव की बात कही। 

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन के अनुसार, पत्रकारों पर स्थानीय अधिकारियों से निजी तौर पर मिलने का दबाव डाला गया और इनकार के बाद उन्हें होटल खाली करने के लिए कहा गया। प्रेस क्लब ने कथित निगरानी की भी जांच मांगी है। 

इंस्टाग्राम अकाउंट क्यों हुए निलंबित?

5 सितंबर को बिंदु गुर्जर की बालाघाट अस्पताल से जुड़ी रिपोर्ट पर कॉपीराइट स्ट्राइक आने के बाद अगले दिन उनके और मोनिका सिंह के इंस्टाग्राम अकाउंट निलंबित हो गए। लोकभद्र सिंह का अकाउंट भी कई बार निलंबित होने की जानकारी सामने आई। पत्रकारों ने इसे मूल रिपोर्टिंग बताया। बाद में अपील के बाद कुछ अकाउंट बहाल हुए। 

मेटा की ओर से दिए गए कारणों में अकाउंट इंटीग्रिटी और कम्युनिटी स्टैंडर्ड से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख था। उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्थापित नहीं हुआ कि इन निलंबनों के पीछे बालाघाट की रिपोर्टिंग ही आधिकारिक रूप से कारण थी। पत्रकारों ने हालांकि घटनाओं के समय और संदर्भ को लेकर सवाल उठाए हैं। 

सवाल सिर्फ पत्रकारों का नहीं

इस पूरे मामले का दूसरा पहलू बालाघाट के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था का है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी बच्चों की मौतों से जुड़ी जनहित याचिका पर राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर से जवाब मांगा है। अदालत के सामने प्रभावित इलाकों की जमीनी स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े दावे रखे गए हैं। 

ऐसे में जरूरी है कि बच्चों की मौतों के कारण, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और पत्रकारों द्वारा लगाए गए दबाव तथा निगरानी के आरोप—तीनों की स्वतंत्र और तथ्य आधारित जांच हो। क्योंकि ऐसी घटनाओं में परिवारों की आवाज और पत्रकारों की रिपोर्टिंग प्रशासन को वास्तविक स्थिति समझने में मदद कर सकती है और पूरे मामले की निष्पक्ष तस्वीर सामने आ सके। 

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बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग पर दबाव के आरोप, पत्रकारों के Instagram अकाउंट सस्पेंड

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बालाघाट में बैगा और गोंड बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों ने निगरानी और दबाव के आरोप लगाए। तीन पत्रकारों के Instagram अकाउंट भी अस्थायी रूप से सस्पेंड हुए।

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