गुजरात के मोरबी जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले जलाने के मामले ने किसान आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मोरबी तालुका पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार घटना 17 सितंबर की रात जेतपर गांव में हुई।
जेतपर और आसपास के किसान पिछले कई महीनों से खेतों के बीच से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन लाइन और टावरों का विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इससे कृषि भूमि प्रभावित होगी और खेती करना मुश्किल हो सकता है। उनकी प्रमुख मांग अधिक मुआवजा और खेती की जमीन की सुरक्षा है।
यह परियोजना हलवद ट्रांसमिशन लिमिटेड से जुड़ी है, जो अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस की एक विशेष प्रयोजन कंपनी है। किसानों के मुताबिक, टावर और बिजली लाइन उनकी जमीन के इस्तेमाल, खेती की क्षमता और भविष्य के मूल्य को प्रभावित कर सकते हैं।
पुलिस की एफआईआर के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुतलों पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाई गई और सार्वजनिक रास्ते पर जमावड़ा हुआ। मामले में आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़े, रास्ता रोकने, आग से जुड़े प्रावधान और सार्वजनिक शांति भंग करने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर पुलिस इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज हुई।
किसानों का पक्ष इससे अलग है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनका विरोध प्रधानमंत्री के जन्मदिन के खिलाफ नहीं था, बल्कि ट्रांसमिशन लाइन, मुआवजे और कृषि भूमि की सुरक्षा को लेकर था। एफआईआर में नामजद कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि वे पुतला दहन के समय मौके पर मौजूद नहीं थे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले में स्थानीय राजनीतिक समर्थन भी सामने आया है। मोरबी के भाजपा विधायक और गुजरात सरकार में मंत्री कांतिभाई अमृतिया के भाइयों ने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया है। द वायर हिंदी के अनुसार, उनके भाई काराभाई अमृतिया ने एफआईआर को किसानों को परेशान करने का तरीका बताया। पुलिस और भाजपा के संबंधित पक्षों से तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।
किसानों की मांग केवल मुआवजे की राशि तक सीमित नहीं है। वे जमीन के बाजार मूल्य के आधार पर भुगतान, फसल और पेड़ों के नुकसान की भरपाई, दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं। जुलाई में गुजरात सरकार ने मुआवजे की व्यवस्था में कुछ बदलावों की घोषणा की थी, लेकिन किसानों का आंदोलन जारी रहा।
अब जांच में एफआईआर के आरोपों की वास्तविक स्थिति तय होगी। दूसरी ओर, किसानों के लिए एक बड़ा सवाल यही है कि बिजली परियोजना के लिए उनकी जमीन के इस्तेमाल का ऐसा समाधान कब निकलेगा, जिसमें मुआवजा, खेती की सुरक्षा और भविष्य के नुकसान की जिम्मेदारी स्पष्ट हो।
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गुजरात में मोदी-शाह के पुतले फूंकने पर 21 किसानों पर FIR, बिजली लाइन को लेकर आंदोलन
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मोरबी में पीएम मोदी और अमित शाह के पुतले जलाने के मामले में 21 किसानों पर FIR दर्ज हुई। किसान हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन, मुआवजे और खेती की जमीन की सुरक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
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