अहमदाबाद: गुजरात में राजनीतिक चंदे और कथित कर चोरी से जुड़ा मामला सामने आया है। आयकर विभाग की शिकायतों के आधार पर गुजरात CID (क्राइम) ने दो राजनीतिक दलों के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। शिकायतों में स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (SAP) और गरीब कल्याण पार्टी (GKP) के बैंक खातों के जरिए 725 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी चंदे और टैक्स से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। मामले में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बिचौलियों, कर सलाहकारों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का विषय हैं और अदालत में अभी सिद्ध नहीं हुए हैं।
चंदे की रसीद और टैक्स छूट का आरोप
आयकर विभाग के मुताबिक, कुछ करदाताओं ने दोनों राजनीतिक दलों के खातों में बैंकिंग माध्यम से रकम जमा की। इसके बदले उन्हें राजनीतिक चंदे की रसीदें दी गईं, जिनका इस्तेमाल आयकर कानून के तहत कटौती का दावा करने के लिए किया गया। शिकायतों में आरोप है कि इसके बाद रकम अलग-अलग संस्थाओं या मध्यस्थों के खातों में भेजी गई और कमीशन काटकर बाकी राशि नकद में दानदाताओं को वापस कर दी गई।
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी से जुड़ा मामला
पहली FIR स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी से संबंधित है। आयकर विभाग ने आरोप लगाया है कि 2023-24 और 2024-25 के दौरान पार्टी के बैंक खातों में करीब 519 करोड़ रुपये के संदिग्ध चंदे का लेनदेन हुआ। शिकायत में पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी, कर सलाहकार मेहुल कुमार खत्री और चार्टर्ड अकाउंटेंट मयूरसिंह राठौड़ समेत अन्य लोगों के नाम हैं।
FIR के अनुसार, कथित लेनदेन में चेक और RTGS के जरिए रकम जमा कराई गई। इसके बाद जय ट्रेडिंग कंपनी समेत अन्य संस्थाओं के माध्यम से धनराशि आगे भेजे जाने और 8 से 9 प्रतिशत तक कमीशन काटे जाने का आरोप है। आयकर विभाग ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित दस्तावेज और योगदान रिपोर्ट पर्याप्त सत्यापन के बिना तैयार या अपलोड किए गए।
गरीब कल्याण पार्टी पर 206 करोड़ का आरोप
दूसरी FIR गरीब कल्याण पार्टी के खिलाफ दर्ज की गई है। आयकर विभाग के अनुसार, 2022-23 से 2025-26 के बीच पार्टी के बैंक खातों में 206 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी चंदे का लेनदेन हुआ। इस मामले में पार्टी अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय, सचिव धनंजयसिंह राजपूत और कोषाध्यक्ष धीरजकुमार क्षत्रिय सहित कई लोगों के नाम हैं।
शिकायत में आरोप है कि रकम कृष्णा एंटरप्राइज और जालाराम एंटरप्राइज जैसी संस्थाओं के जरिए आगे भेजी गई। कथित तौर पर 5 से 7 प्रतिशत कमीशन काटने के बाद बाकी पैसा नकद लौटाया गया। विभाग ने यह भी दावा किया है कि इससे करदाताओं को अनुचित टैक्स कटौती का लाभ मिला और सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ।
अब CID जांच पर नजर
दोनों मामलों में CID की FIR के बाद जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। जांच एजेंसी को बैंक लेनदेन, चंदे की रसीदों, आयकर दस्तावेजों, ऑडिट रिपोर्ट और कथित मध्यस्थों की भूमिका की जांच करनी होगी। आरोपों की पुष्टि होने या न होने का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले साक्ष्यों से होगा।
राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और उससे जुड़े टैक्स लाभ की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। इस केस में जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित लेनदेन किस स्तर तक फैला था और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
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