Top News

जनगणना 2027 की नई प्रश्नावली: माता-पिता की जानकारी से आधार-पासपोर्ट तक, डेटा सुरक्षा पर उठे सवाल


नई दिल्ली। भारत की आगामी जनगणना 2027 इस बार सिर्फ आबादी गिनने की कवायद नहीं रहने वाली है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित प्रश्नावली में कई ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं, जो नागरिकों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और पहचान से जुड़ी जानकारी का दायरा पहले के मुकाबले काफी व्यापक बनाते हैं। आधिकारिक तौर पर दूसरे चरण की जनसंख्या गणना में 40 सवाल रखे गए हैं। इनमें धर्म, जाति, माता-पिता की जानकारी, जन्मस्थान, प्रवास, बैंक खातों की संख्या और कोविड-19 टीकाकरण जैसी जानकारियां शामिल हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा उन सवालों को लेकर है जिनमें माता-पिता की जानकारी, व्यक्ति का धर्म, जाति और जन्मस्थान दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा स्थायी पते और पिछली जगह के निवास से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। सरकार के लिए ये आंकड़े देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर समझने तथा भविष्य की योजनाएं बनाने में उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन इतने व्यापक स्तर पर व्यक्तिगत जानकारी जुटाए जाने के साथ डेटा की सुरक्षा और इस्तेमाल को लेकर सवाल उठना भी स्वाभाविक है।

जनगणना में पहली बार जाति का व्यापक आंकड़ा

जनगणना 2027 में जाति की जानकारी दर्ज करने का फैसला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सरकार के अनुसार यह आंकड़ा नीतियां बनाने और सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को समझने में मदद कर सकता है। लेकिन जाति और धर्म जैसी संवेदनशील सामाजिक पहचान से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल कैसे होगा, इन्हें किस स्तर पर सुरक्षित रखा जाएगा और भविष्य में इनकी पहुंच किन संस्थाओं तक होगी—इन सवालों पर स्पष्टता बेहद जरूरी है।

यहां सवाल किसी समुदाय विशेष का नहीं, बल्कि हर नागरिक के डेटा की सुरक्षा का है। अगर सरकार नागरिकों से इतनी विस्तृत जानकारी मांग रही है तो जनता को यह भरोसा भी मिलना चाहिए कि इस जानकारी का इस्तेमाल केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए होगा।

आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट की जानकारी भी

प्रश्नावली में मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी नंबर, भारतीय पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। आधार और मोबाइल जैसी जानकारी के लिए उपलब्धता के आधार पर सवाल रखा गया है। वहीं बैंक खातों की कुल संख्या और कोविड-19 टीकाकरण की जगह जैसी जानकारियां भी मांगी जाएंगी।

यहीं से एक बड़ा सवाल सामने आता है—जनगणना में इतनी विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने की जरूरत और उसके इस्तेमाल की सीमाएं जनता को कितनी स्पष्ट तरीके से बताई गई हैं?

जनगणना देश की योजना बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पिछली नियमित जनगणना 2011 में हुई थी और 2027 की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से भी संचालित की जा रही है। सरकार ने डेटा सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाने की बात कही है।

सवाल आंकड़ों से ज्यादा भरोसे का है

सरकार के सामने चुनौती सिर्फ करोड़ों नागरिकों का डेटा जुटाने की नहीं, बल्कि उस डेटा को लेकर भरोसा कायम करने की भी है। खासकर जब धर्म, जाति, प्रवास, पहचान दस्तावेज और पारिवारिक पृष्ठभूमि जैसी सूचनाएं एक ही प्रक्रिया में दर्ज हो रही हों।

इसलिए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन आंकड़ों का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए होगा, इन्हें कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा और अनधिकृत इस्तेमाल से बचाने के लिए क्या ठोस सुरक्षा व्यवस्था होगी।

जनगणना का उद्देश्य नागरिकों को वर्गीकृत करना नहीं, बल्कि देश की वास्तविक तस्वीर सामने लाना होना चाहिए। आंकड़े सरकार की ताकत हैं, लेकिन नागरिक का भरोसा लोकतंत्र की ताकत है। यही भरोसा कायम रखना जनगणना 2027 की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

SEO Keywords: जनगणना 2027, Census 2027, जनगणना की नई प्रश्नावली, जनगणना 2027 40 सवाल, जाति जनगणना, धर्म की जानकारी, माता-पिता की जानकारी, आधार वोटर आईडी पासपोर्ट, जनगणना डेटा सुरक्षा, भारत की जनगणना

SEO Meta Description: जनगणना 2027 की नई 40 सवालों वाली प्रश्नावली में जाति, धर्म, माता-पिता की जानकारी, बैंक खाते, आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट से जुड़े सवाल शामिल हैं। जानिए डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल।

Post a Comment

Previous Post Next Post

संवाददाता आईडी यहाँ से डाउनलोड करें

NAYAK Bhartiya Nayak

संवाददाता बनेने के लिए

NAYAK Bhartiya Nayak

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume