नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कई चर्चित नामों को चुनाव आयोग के नोटिस मिलने के बाद प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन बी. लोकुर समेत कई प्रमुख लोगों के नाम नोटिस सूची में सामने आए हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक करीब 33.13 लाख मतदाताओं को SIR के दौरान सामने आई विसंगतियों या पिछली मतदाता सूची से मैपिंग न होने के आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस का अर्थ मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। सत्यापन और सुनवाई के बाद ही अंतिम फैसला होगा।
आडवाणी और धनखड़ को क्यों मिला नोटिस?
रिपोर्ट के मुताबिक लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका के नाम पिछली SIR सूची से मैप नहीं हो पाए। जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ के नाम भी इसी श्रेणी में बताए गए हैं। कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी को भी ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में नोटिस मिला है। वहीं जस्टिस मदन बी. लोकुर का नाम एक तार्किक विसंगति के कारण चिह्नित किया गया।
सूची में पूर्व मुख्य न्यायाधीशों की पत्नियों, वरिष्ठ वकीलों, नेताओं और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के नाम भी सामने आए हैं।
चुनाव आयोग की सफाई
दिल्ली CEO कार्यालय ने कहा है कि नोटिस सिस्टम में डेटा सुधार और सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी मतदाता का नाम बिना सुनवाई का अवसर दिए और उचित, कारणयुक्त तथा अपील योग्य आदेश के बिना हटाया नहीं जा सकता। अधिकारियों के मुताबिक सत्यापन की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक पूरी होनी है और अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
फिर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
कपिल सिब्बल ने अपने मामले का हवाला देते हुए पूछा कि जब पहले से दस्तावेज और सत्यापन मौजूद हैं, तब भी नोटिस क्यों भेजा गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी व्यापक स्तर पर चल रही प्रक्रिया की आलोचना की है। ये उनके राजनीतिक आरोप और सवाल हैं, जिन्हें आयोग की ओर से किए गए स्पष्टीकरण के साथ देखा जाना चाहिए।
इसी बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में नोटिस के बाद तेजी से दस्तावेज सत्यापन और नाम को अंतिम सूची में रखने की मंजूरी ने भी बहस को बढ़ाया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या आम मतदाताओं को भी इसी तरह की गति और सुविधा मिल रही है?
यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कड़ी है। किसी पात्र मतदाता का नाम सुरक्षित रखना और गलत प्रविष्टियों की पहचान करना, दोनों जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।
ऐसे में “क्या चुनाव आयोग अपनी छवि साफ करने की कोशिश में है?” यह सवाल राजनीतिक बहस में उठाया जा सकता है, लेकिन इसे तथ्य के रूप में कहना अभी जल्दबाजी होगी। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया सभी मतदाताओं के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार चल रही है। असली कसौटी यही होगी कि लाखों मामलों में सत्यापन समान, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होता है या नहीं।
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दिल्ली SIR में आडवाणी, जगदीप धनखड़, कपिल सिब्बल और जस्टिस मदन लोकुर समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस मिला। आयोग की सफाई और उठ रहे सवाल जानिए।
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