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अरुणाचल में SIR की सुनवाई के दौरान तनाव, चकमा मतदाताओं के खिलाफ 1,292 आपत्तियां; हिंसा के आरोपों से बढ़ी चिंता


नई दिल्ली/अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चकमा और हाजोंग बहुल इलाकों में विवाद और तनाव के बीच आगे बढ़ रही है। चकमा समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि उनके मतदाताओं के खिलाफ ‘भारतीय नागरिक नहीं’ होने के आधार पर कुल 1,292 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इस प्रक्रिया को लेकर ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) और स्थानीय समुदायों की आपत्तियां भी सामने आई हैं।

मामला तब ज्यादा गंभीर हो गया जब 3 और 4 सितंबर को चांगलांग जिले के बोर्डुमसा में SIR के तहत दावों और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान टकराव और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। आधिकारिक प्रक्रिया में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 से जुड़े मामलों की सुनवाई होनी थी, लेकिन विरोध और व्यवधान के कारण पहले दिन की सुनवाई को स्थगित करना पड़ा। अगले दिन भी स्थिति तनावपूर्ण रही।

1,292 आपत्तियों ने खड़े किए सवाल

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, चकमा समुदाय के लोगों ने दावा किया है कि पड़ोसी सिंगफो और खामती समुदायों से जुड़े लोगों ने 1,292 चकमा मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराईं। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के केंद्र में AAPSU की यह मांग है कि 2006 के बाद मतदाता सूची में शामिल किए गए कथित चकमा और हाजोंग मतदाताओं की जांच की जाए।

चकमा समुदाय का इतिहास भी इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के मुताबिक, 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1964 में पुनर्वास योजना के तहत चकमा लोगों को अरुणाचल प्रदेश में बसाया गया था। चांगलांग जिले की 2026 की मतदाता सूची में चकमा और हाजोंग समुदाय के 7,788 पंजीकृत मतदाता बताए गए हैं।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

4 सितंबर को बोर्डुमसा में तनाव बढ़ने की खबर सामने आई। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सुनवाई स्थल पर पहुंचकर प्रक्रिया को बाधित किया और सरकारी कार्यालय में नुकसान की घटना हुई। वहीं चकमा समुदाय की ओर से पथराव और धमकी जैसे आरोप लगाए गए। इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे हैं, इसलिए किसी एक पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार जरूरी है।

AAPSU ने भी घटना को लेकर अलग पक्ष रखा है। संगठन ने आरोप लगाया कि चकमा और हाजोंग समुदाय से जुड़े लोग हथियारों के साथ मौजूद थे और उसके कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। संगठन के एक सदस्य के घायल होने का भी दावा किया गया।

अब आगे क्या?

हिंसा के बाद मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि शिकायत रखने वाले लोगों को SIR से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए। 8 सितंबर को AAPSU के प्रतिनिधियों ने संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की और बाद में SIR की सुनवाई प्रक्रिया जारी रहने देने की बात कही। 9 सितंबर को करीब 6,000 चकमा और हाजोंग लोगों की बैठक हुई, जिसमें संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने की बात कही गई। लंबित सुनवाई 10 सितंबर को बिजोयपुर में हुई।

अब असली सवाल यही है कि SIR के दौरान हर दावे और आपत्ति की जांच क्या समान और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होगी? मतदाता सूची में नाम शामिल करना या हटाना किसी समुदाय की पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तय होना चाहिए। इसी के साथ, सुनवाई के दौरान किसी भी तरह का दबाव या हिंसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

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