नई दिल्ली: मार्च 2026 में गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पहली चार्जशीट और उसके बाद अदालत के फैसले ने कई कानूनी सवाल खड़े किए हैं। NIA ने पहली चार्जशीट में सातों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराएं शामिल नहीं कीं। इसके बाद दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने सभी सात आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत दे दी और उन्हें एक महीने के लिए अपने-अपने देश जाकर परिवार से मिलने की अनुमति भी दी।
मार्च में हुई थी सातों की गिरफ्तारी
मामला उस समय सामने आया था जब NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने शुरुआत में आरोप लगाया था कि आरोपी भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचे और वहां जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े कथित ड्रोन प्रशिक्षण तथा अन्य गतिविधियों में शामिल थे।
NIA ने इस मामले में शुरुआत में UAPA की धारा 18 समेत अन्य प्रावधानों के तहत जांच शुरू की थी। एजेंसी का आरोप था कि मामला केवल आव्रजन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापक साजिश की भी जांच की जा रही थी। हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
पहली चार्जशीट में क्या बदला?
सितंबर की शुरुआत में दाखिल पहली चार्जशीट में NIA ने सातों के खिलाफ Immigration and Foreigners Act, 2025 के तहत आरोप लगाए। इनमें प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और भारत में अवैध प्रवेश, ठहरने या आवाजाही से जुड़े आरोप शामिल बताए गए हैं।
खास बात यह रही कि इस चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई गईं। NIA ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि UAPA के तहत जांच बंद नहीं हुई है और आगे की जांच जारी रखी जा सकती है। एजेंसी के अनुसार, कानून आगे की जांच और जरूरत पड़ने पर पूरक चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति देता है।
डिफॉल्ट जमानत का रास्ता कैसे खुला?
इस मामले में समयसीमा भी महत्वपूर्ण रही। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों की न्यायिक हिरासत की निर्धारित अवधि पूरी होने वाली थी। UAPA के तहत जांच और चार्जशीट की समयसीमा से जुड़े प्रावधानों के कारण आरोपियों ने डिफॉल्ट जमानत का दावा किया।
दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने पहले अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दी। इसके बाद छह यूक्रेनी नागरिकों को भी जमानत मिली। अदालत ने बाद में सातों को अपने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी।
एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति
अदालत ने विदेश जाने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी है। सातों आरोपी अपने संबंधित देशों में करीब एक महीने तक रह सकेंगे और निर्धारित अवधि के बाद भारत लौटना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होना होगा।
इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UAPA की धाराएं पहली चार्जशीट में शामिल नहीं हैं, लेकिन NIA का कहना है कि इससे पूरी UAPA जांच खत्म नहीं हुई है। आगे की जांच में यदि एजेंसी को अतिरिक्त साक्ष्य मिलते हैं, तो पूरक चार्जशीट के जरिए आगे के आरोप लगाए जा सकते हैं।
फिलहाल सातों को अदालत से डिफॉल्ट जमानत मिल चुकी है और उन्हें परिवार से मिलने के लिए विदेश जाने की अनुमति भी दी गई है। मामले की आगे की दिशा NIA की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
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