नई दिल्ली: राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने एक बार फिर संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर चर्चा तेज कर दी है। अदालत ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अंतरात्मा या धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियां या पूरा गीत नहीं गाता, तो केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। फिलहाल यह मामला विचाराधीन है और केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है।
यह मामला प्रसिद्ध कर्नाटक संगीतकार टी. एम. कृष्णा की याचिका से जुड़ा है। याचिका में Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में किए गए हालिया संशोधन और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाने से जुड़े निर्देशों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि गीत के कुछ अंतरों में देवी-देवताओं का उल्लेख है और ऐसे में हर नागरिक को इसे अनिवार्य रूप से गाने के लिए बाध्य करना धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरात्मा की आज़ादी से जुड़े सवाल खड़े करता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के प्रसिद्ध बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले का भी उल्लेख किया। उस फैसले में अदालत ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक मान्यताओं के कारण राष्ट्रगान नहीं गाता, लेकिन सम्मान बनाए रखता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने संकेत दिया कि यही संवैधानिक सिद्धांत वंदे मातरम् के मामले में भी प्रासंगिक हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान की संवैधानिक स्थिति अलग है। अदालत के समक्ष यह सवाल भी उठा कि क्या राष्ट्रीय गीत के संदर्भ में दंडात्मक प्रावधानों की भाषा स्पष्ट है और कहीं उसका दुरुपयोग तो नहीं हो सकता। इसी कारण अदालत ने इस विषय पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता जताई है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का पक्ष है कि वंदे मातरम् से जुड़े निर्देश एक प्रकार की प्रोटोकॉल व्यवस्था हैं और इन्हें नागरिकों पर कानूनी दबाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट यह टिप्पणी कर चुका है कि वंदे मातरम् गाने को लेकर जारी परामर्श बाध्यकारी नहीं है और इसके लिए कोई दंडात्मक परिणाम स्वतः लागू नहीं होते।
यह मामला केवल एक गीत तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न है—देशभक्ति की अभिव्यक्ति का स्वरूप क्या हो, और क्या किसी नागरिक की धार्मिक या व्यक्तिगत मान्यता के कारण उसे दंडित किया जा सकता है? अंतिम निर्णय अदालत के विस्तृत विचार और केंद्र सरकार के जवाब के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल इस मामले ने मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता पर नई बहस शुरू कर दी है।
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धार्मिक वजह से ‘वंदे मातरम्’ न गाना अपराध नहीं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से नई बहस
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक या अंतरात्मा के आधार पर वंदे मातरम् न गाने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। जानिए पूरा मामला और संवैधानिक बहस।
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