लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछती नजर आती हैं और इसके तुरंत बाद योगी आदित्यनाथ मंच से निकलते दिखाई देते हैं। घटना के बाद पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और सवाल पूछने तथा घटना को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड करने को लेकर उनसे आपत्ति जताई।
यह घटना 12 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई। कार्यक्रम का आयोजन ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान की जानकारी दी।
पत्रकार ने पूछा—जब सवाल नहीं लेने तो प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों?
वायरल वीडियो में पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव मुख्यमंत्री से सवाल करती दिखाई देती हैं। वह पूछती हैं कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस है और अगर पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया जाना है, तो फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का उद्देश्य क्या है।
इसके बाद मुख्यमंत्री मंच से निकलते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में पत्रकार अपने मोबाइल फोन से घटनाक्रम रिकॉर्ड करने की कोशिश करती नजर आती हैं।
दिव्या श्रीवास्तव ने बाद में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के मंच से जाने के बाद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया। उनके मुताबिक, उनसे सवाल पूछने और वीडियो रिकॉर्ड करने को लेकर आपत्ति जताई गई तथा मोबाइल कैमरा बंद करने के लिए कहा गया। पत्रकार ने यह भी कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कोई अभद्र भाषा में सवाल नहीं किया था, बल्कि केवल अपने सवाल का जवाब मांगा था।
विवाद के बाद प्रेस की स्वतंत्रता पर बहस
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को सवाल पूछने की कितनी स्वतंत्रता होनी चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मूल उद्देश्य ही पत्रकारों और सत्ता में बैठे लोगों के बीच संवाद का माध्यम बनना है। ऐसे में अगर सवालों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस और केवल भाषण देने वाले कार्यक्रम के बीच अंतर को लेकर बहस होना स्वाभाविक है।
लखनऊ के एक पत्रकार ने द वायर से बातचीत में कहा कि भाजपा कार्यालय में होने वाली ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस आम तौर पर सरकार और पार्टी का पक्ष रखने के लिए होती हैं और वहां सवाल पूछने की गुंजाइश सीमित रहती है। हालांकि, उन्होंने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वहां पार्टी के प्रवक्ता पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हैं।
अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल
मामले पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘प्रेस मोनोलॉग’ यानी एकतरफा संवाद कहा जाना चाहिए। उनका सवाल था कि जब संवाद की जगह केवल बयान देना रह जाए तो फिर उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस कहने का क्या मतलब है।
हालांकि, इस पूरे विवाद में यह भी जरूरी है कि पत्रकार के लगाए गए आरोपों को जांच के बिना अंतिम तथ्य न माना जाए। भाजपा की ओर से इस आरोप पर अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सवाल आखिरकार इतना ही है—लोकतंत्र में पत्रकार का काम सिर्फ सत्ता की बात सुनना है या सत्ता से सवाल पूछना भी?
सरकारें और राजनीतिक दल जनता के सामने जवाबदेह होते हैं। और पत्रकार उस जवाबदेही को सवालों के जरिए सामने लाने का काम करते हैं। इसलिए सवाल पूछे जाने से असहमति हो सकती है, लेकिन सवाल पूछने के अधिकार पर बहस लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
नीचे लेख को उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों को आरोप के रूप में ही रखा गया है और भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया न मिलने की बात भी उसी संदर्भ में लिखी गई है।
सवाल पूछते ही मंच से चले गए योगी? महिला पत्रकार ने BJP कार्यकर्ताओं पर बदसलूकी का लगाया आरोप
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछती नजर आती हैं और इसके तुरंत बाद योगी आदित्यनाथ मंच से निकलते दिखाई देते हैं। घटना के बाद पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और सवाल पूछने तथा घटना को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड करने को लेकर उनसे आपत्ति जताई।
यह घटना 12 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई। कार्यक्रम का आयोजन ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान की जानकारी दी।
पत्रकार ने पूछा—जब सवाल नहीं लेने तो प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों?
वायरल वीडियो में पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव मुख्यमंत्री से सवाल करती दिखाई देती हैं। वह पूछती हैं कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस है और अगर पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया जाना है, तो फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का उद्देश्य क्या है।
इसके बाद मुख्यमंत्री मंच से निकलते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में पत्रकार अपने मोबाइल फोन से घटनाक्रम रिकॉर्ड करने की कोशिश करती नजर आती हैं।
दिव्या श्रीवास्तव ने बाद में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के मंच से जाने के बाद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया। उनके मुताबिक, उनसे सवाल पूछने और वीडियो रिकॉर्ड करने को लेकर आपत्ति जताई गई तथा मोबाइल कैमरा बंद करने के लिए कहा गया। पत्रकार ने यह भी कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से कोई अभद्र भाषा में सवाल नहीं किया था, बल्कि केवल अपने सवाल का जवाब मांगा था।
विवाद के बाद प्रेस की स्वतंत्रता पर बहस
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राजनीतिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को सवाल पूछने की कितनी स्वतंत्रता होनी चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मूल उद्देश्य ही पत्रकारों और सत्ता में बैठे लोगों के बीच संवाद का माध्यम बनना है। ऐसे में अगर सवालों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस और केवल भाषण देने वाले कार्यक्रम के बीच अंतर को लेकर बहस होना स्वाभाविक है।
लखनऊ के एक पत्रकार ने द वायर से बातचीत में कहा कि भाजपा कार्यालय में होने वाली ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस आम तौर पर सरकार और पार्टी का पक्ष रखने के लिए होती हैं और वहां सवाल पूछने की गुंजाइश सीमित रहती है। हालांकि, उन्होंने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वहां पार्टी के प्रवक्ता पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हैं।
अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल
मामले पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘प्रेस मोनोलॉग’ यानी एकतरफा संवाद कहा जाना चाहिए। उनका सवाल था कि जब संवाद की जगह केवल बयान देना रह जाए तो फिर उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस कहने का क्या मतलब है।
हालांकि, इस पूरे विवाद में यह भी जरूरी है कि पत्रकार के लगाए गए आरोपों को जांच के बिना अंतिम तथ्य न माना जाए। भाजपा की ओर से इस आरोप पर अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सवाल आखिरकार इतना ही है—लोकतंत्र में पत्रकार का काम सिर्फ सत्ता की बात सुनना है या सत्ता से सवाल पूछना भी?
सरकारें और राजनीतिक दल जनता के सामने जवाबदेह होते हैं। और पत्रकार उस जवाबदेही को सवालों के जरिए सामने लाने का काम करते हैं। इसलिए सवाल पूछे जाने से असहमति हो सकती है, लेकिन सवाल पूछने के अधिकार पर बहस लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।SEO Title: योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछते ही मंच से चले गए? महिला पत्रकार ने BJP कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप
Meta Description: लखनऊ में CM योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो वायरल है। पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने सवाल पूछने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं पर घेरने और मोबाइल कैमरा बंद कराने का आरोप लगाया।
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