नई दिल्ली: वर्ष 2005 के सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 आरोपियों के बरी होने को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई की है। अदालत ने बरी किए गए सभी 22 लोगों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। इनमें गुजरात और राजस्थान के 21 पुलिसकर्मी और एक अन्य आरोपी शामिल हैं। मामला सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़ा है।
92 गवाहों के मुकरने पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मुकदमे में अभियोजन पक्ष के 210 गवाहों में से 92 के अपने पूर्व बयानों से मुकर जाने के तथ्य को गंभीरता से लिया। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर गवाहों का मुकरना चिंता का विषय है और यह देखना जरूरी होगा कि मुकदमा निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से चला या नहीं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी संकेत दिया कि वह पूरे मुकदमे का रिकॉर्ड फिलहाल तलब करने के बजाय कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान देखना चाहती है। अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष से ऐसे तीन-चार महत्वपूर्ण बयानों को सामने रखने को कहा, जिनसे मामले की स्थिति समझने में मदद मिल सके।
2018 में विशेष CBI अदालत ने किया था बरी
सोहराबुद्दीन मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुजरात CID से CBI को सौंपी गई थी और मुकदमे को गुजरात से मुंबई स्थानांतरित किया गया था। दिसंबर 2018 में मुंबई की विशेष CBI अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष हत्या की कथित साजिश और आरोपियों की भूमिका को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सका।
इसके बाद इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 7 मई 2026 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और कथित घटनाक्रम की कड़ियों को पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं किया जा सका।
अब सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या सवाल?
सोहराबुद्दीन के भाई की ओर से दाखिल याचिका में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि मामले में बड़ी संख्या में गवाहों के मुकरने के कारण अभियोजन का मामला कमजोर हुआ और इस पहलू की दोबारा जांच जरूरी है। दूसरी ओर, कुछ आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों ने विस्तृत फैसलों के आधार पर आरोपियों को बरी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया है। अदालत का मौजूदा कदम बरी किए जाने के फैसले की न्यायिक समीक्षा के लिए जवाब मांगने और कुछ महत्वपूर्ण गवाहियों की जांच तक सीमित है। साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कार्यवाही में तत्कालीन गुजरात गृह मंत्री अमित शाह के मामले में हुई डिस्चार्ज की कार्यवाही को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
अब अगली सुनवाई में आरोपियों और संबंधित पक्षों के जवाब तथा महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों पर अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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