अयोध्या/नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले ने एक बार फिर मंदिर प्रशासन, जांच की रफ्तार और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल यानी SIT ने अपनी जांच में चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर हटाने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान की है। जांच में CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड को आधार बनाया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIT 25 सितंबर 2026 तक आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिनों की वैधानिक अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है।
105 घटनाओं तक कैसे पहुंची जांच?
SIT ने मंदिर परिसर के चढ़ावा गिनती केंद्र की CCTV रिकॉर्डिंग और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, फुटेज में 105 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें गिनती कक्ष से नकदी को कथित तौर पर हटाने या छिपाने की बात सामने आई। जांच में आठ आरोपियों की पहचान किए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया से ही होगा।
SIT ने कीमती चढ़ावे से जुड़े कुछ आरोपों की भी जांच की। सुप्रीम कोर्ट में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, करीब 200 किलोग्राम और 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटों सहित कुछ अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की जांच में कोई विसंगति नहीं पाई गई।
अब सवाल जांच की रफ्तार पर भी
इस पूरे मामले ने एक असहज लेकिन जरूरी सवाल भी खड़ा किया है—अगर इस मामले में आरोपी मुस्लिम होते, तो क्या जांच और कार्रवाई की रफ्तार इतनी ही रहती? इस सवाल का कोई तथ्यात्मक उत्तर फिलहाल उपलब्ध नहीं है और केवल आरोपियों के धर्म के आधार पर ऐसी तुलना का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि कानून और जांच की प्रक्रिया हर आरोपी के लिए एक जैसी और बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लागू होनी चाहिए।
राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। इसलिए मामला केवल चोरी की कथित घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर में दान की गिनती, रिकॉर्डिंग, सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
अब सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज SIT की चार्जशीट होगी। उसमें कथित चोरी की घटनाओं, रकम, आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत विवरण सामने आने की उम्मीद है। 25 सितंबर की समयसीमा के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच किन निष्कर्षों तक पहुंची और आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।
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