लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार अब गो-संरक्षण अभियान को नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z युवाओं से जोड़ने की तैयारी कर रही है। सरकार की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक ग्रामीण स्तर पर युवाओं को गो-संरक्षण, गो-सेवा और इससे जुड़े सामाजिक व आर्थिक पहलुओं की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण अभियान चलाने की योजना है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार करीब 10 हजार युवाओं को ‘गो मित्र’ के तौर पर तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में गो-संरक्षण लंबे समय से सरकार की प्रमुख नीतियों में शामिल रहा है। राज्य सरकार पहले भी गोवंश संरक्षण, गोशालाओं और अवैध पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अपनी नीतियां सामने रखती रही है। मार्च 2026 में सरकार ने बताया था कि जून 2020 से गोहत्या से जुड़े मामलों में हजारों मुकदमे दर्ज हुए और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की गईं।
अब सरकार का फोकस केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय युवाओं को इस अभियान से जोड़ने पर दिखाई दे रहा है। विचार यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय युवा गोशालाओं और गोवंश की देखभाल से जुड़े कामों में भूमिका निभाएं। इसके पीछे गो-संरक्षण के साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना भी बताई जा रही है।
लेकिन यहीं से कुछ जरूरी सवाल भी सामने आते हैं।
युवाओं को ‘गो मित्र’ बनाना, लेकिन आगे क्या?
किसी भी सरकारी योजना की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि कितने युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। असली सवाल यह है कि प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं की भूमिका क्या होगी? क्या उन्हें मानदेय मिलेगा? क्या यह स्थायी या अस्थायी रोजगार होगा? उनकी जिम्मेदारियां क्या होंगी? और अगर वे ग्रामीण स्तर पर काम करेंगे तो उनकी सुरक्षा और प्रशासनिक सहायता की व्यवस्था कौन करेगा?
सरकार यदि युवाओं को इस अभियान से जोड़ना चाहती है तो उसे इन सवालों पर स्पष्ट नीति सार्वजनिक करनी चाहिए। केवल किसी अभियान से युवाओं को जोड़ देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और स्पष्ट जिम्मेदारी देना भी उतना ही जरूरी है।
गोशालाओं की जमीन पर असली परीक्षा
गो-संरक्षण की किसी भी योजना का मूल्यांकन केवल आंकड़ों से नहीं बल्कि गोशालाओं की वास्तविक स्थिति से होना चाहिए। क्या गोशालाओं में पर्याप्त चारा है? पानी और पशु चिकित्सा की सुविधा कैसी है? बीमार और बुजुर्ग पशुओं की देखभाल कौन करेगा? छुट्टा गोवंश की समस्या कितनी कम हुई? और सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है?
यही वे सवाल हैं जिनका जवाब जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
अगर हजारों युवाओं को ‘गो मित्र’ बनाकर अभियान शुरू किया जाता है, लेकिन गोशालाओं की मूलभूत समस्याएं बनी रहती हैं, तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह सकता है। इसके उलट यदि युवाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार, पशुपालन संबंधी आधुनिक जानकारी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर दिए जाते हैं, तो यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ सकती है।
Gen-Z को जोड़ना कितना कारगर होगा?
नई पीढ़ी को किसी सामाजिक अभियान से जोड़ने के लिए सिर्फ भावनात्मक अपील पर्याप्त नहीं होगी। Gen-Z सवाल पूछने वाली पीढ़ी है और वह किसी भी योजना के परिणाम जानना चाहेगी। इसलिए सरकार को इस अभियान में पारदर्शिता, आंकड़ों की सार्वजनिक जानकारी और स्वतंत्र मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं को भी शामिल करना चाहिए।
आखिर 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षण देना एक संख्या है, लेकिन उन युवाओं को सम्मानजनक अवसर देना असली उपलब्धि होगी।
गो-संरक्षण को लेकर समाज में अलग-अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन पशुओं की देखभाल, ग्रामीण रोजगार और सार्वजनिक धन के सही इस्तेमाल पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसलिए सरकार की इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इसे केवल अभियान बनाती है या वास्तव में युवाओं के लिए जिम्मेदारी, रोजगार और ग्रामीण विकास से जोड़ती है।
सवाल सीधा है—‘गो मित्र’ बनने वाले युवाओं को सिर्फ जिम्मेदारी मिलेगी या उनके लिए अधिकार, प्रशिक्षण, संसाधन और रोजगार का रास्ता भी खुलेगा?
यही सवाल इस पूरी योजना की असली परीक्षा है।
स्रोत: उपलब्ध सरकारी जानकारी और प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर।
SEO Keywords: उत्तर प्रदेश गो संरक्षण, गो मित्र योजना, योगी सरकार गो संरक्षण, Gen-Z गो मित्र, 10 हजार गो मित्र, यूपी गोशाला, गो सेवा उत्तर प्रदेश, ग्रामीण युवा रोजगार, गो संरक्षण अभियान, उत्तर प्रदेश सरकार
SEO Meta Description: योगी सरकार उत्तर प्रदेश में Gen-Z युवाओं को गो-संरक्षण अभियान से जोड़ने की तैयारी कर रही है। करीब 10 हजार युवाओं को ‘गो मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना पर जानिए पूरी खबर और बड़े सवाल।
Post a Comment