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यूपी में सरकारी स्कूलों के ‘फर्जी वीडियो’ पर FIR का दौर, रामपुर में छह लोगों पर मुकदमा


लखनऊ/रामपुर। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और तस्वीरों को लेकर सरकार ने सख्ती का रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को ऐसे कंटेंट की जांच कराने और यदि सामग्री भ्रामक या फर्जी पाई जाए तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में रामपुर में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

रामपुर के स्वार क्षेत्र के रुस्तमनगर से जुड़ा यह मामला बच्चों के नदी में खड़े होकर फोटो-वीडियो बनाए जाने से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट प्रसारित हुआ, जिसमें बच्चों को नदी पार कर स्कूल जाने की स्थिति में दिखाया गया। जांच के दौरान प्रशासन ने दावा किया कि वायरल वीडियो रामपुर का नहीं, बल्कि उत्तराखंड का था। इसके बाद संबंधित दावे का खंडन किया गया।

इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से स्वार कोतवाली में शिकायत दी गई। पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 और 353 के तहत मामला दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बच्चों को नदी में खड़ा कर फोटो और वीडियो बनवाए गए तथा उन्हें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इस तरह प्रसारित किया गया, जिससे घटना को वास्तविक बताकर सनसनी पैदा हो। मामले में जांच जारी है।

मुख्यमंत्री योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

सरकारी स्कूलों को लेकर सामने आने वाले वीडियो पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि किसी भी स्कूल या शिक्षा व्यवस्था के संबंध में गलत सूचना फैलाने से पहले उसकी वास्तविकता की जांच जरूरी है। सरकार का तर्क है कि भ्रामक वीडियो से स्कूलों की छवि प्रभावित होती है और बच्चों की पढ़ाई का माहौल भी खराब हो सकता है। इसी वजह से अधिकारियों को वायरल सामग्री की सत्यता जांचने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों और यूट्यूबर्स के बिना अनुमति प्रवेश तथा फोटो-वीडियो बनाने को लेकर भी निर्देश जारी हुए हैं। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे बच्चों की सुरक्षा, कक्षा में पढ़ाई प्रभावित होने और विद्यालय परिसर की व्यवस्था बनाए रखने जैसे कारण बताए गए हैं।

सवाल सिर्फ वीडियो का नहीं, हकीकत की जांच का भी

इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—अगर कोई वीडियो सच में सरकारी स्कूल की खराब स्थिति दिखाता है, तो उसकी जांच कैसे होगी और जिम्मेदारी किसकी तय होगी? वहीं अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर पुरानी या किसी दूसरे स्थान की तस्वीर को उत्तर प्रदेश के स्कूल से जोड़कर प्रसारित करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है।

सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और मिड-डे मील को लेकर सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती रही है। लेकिन दूसरी तरफ किसी भी दावे को केवल राजनीतिक बयान के आधार पर सही या गलत मानने के बजाय मौके पर जांच और पारदर्शी रिपोर्ट सामने आना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

रामपुर की FIR के बाद अब नजर इस बात पर है कि जांच में आरोप कितने सही साबित होते हैं और पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है। फिलहाल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों से जुड़े कथित भ्रामक कंटेंट पर प्रशासन की बढ़ती सख्ती का संकेत माना जा रहा है।

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