नायक भारतीय नायक | लखनऊ
लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के स्वागत के दौरान हनुमानजी के वेश में एक कलाकार द्वारा सड़क पर किए गए नृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने बीजेपी पर निशाना साधा था, वहीं अब हिंदू संगठनों की ओर से भी इस आयोजन पर सवाल उठने लगे हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय मंत्री अंबरीश ने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि भगवान हनुमान के स्वरूप को इस प्रकार राजनीतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने ऐसे आयोजन के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बीजेपी को लंबे समय से हिंदुत्व की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में पार्टी के कार्यक्रम में धार्मिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को नया मोड़ दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हाल ही में दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे थे। उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट से लेकर बीजेपी प्रदेश कार्यालय तक भव्य रोड शो आयोजित किया गया था। इस दौरान जगह-जगह कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।
इसी रोड शो के दौरान एक स्थान पर हनुमानजी के वेश में एक कलाकार सड़क पर नृत्य करता दिखाई दिया। कलाकार के हाथ में बीजेपी का झंडा भी था और वह रथ के आगे नाचते हुए स्वागत कर रहा था। किसी ने इस दृश्य का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होते ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं और देखते ही देखते यह राजनीतिक विवाद का विषय बन गया।
विपक्ष ने साधा बीजेपी पर निशाना
वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा सांसद संजय सिंह सहित कई विपक्षी नेताओं ने बीजेपी पर निशाना साधा।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों का राजनीतिक कार्यक्रमों में इस प्रकार उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए बीजेपी से जवाब मांगा।
सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर हजारों लोगों ने अपनी-अपनी राय व्यक्त की। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे स्वागत कार्यक्रम का हिस्सा बताते हुए विवाद को अनावश्यक बताया।
विश्व हिंदू परिषद ने भी जताई आपत्ति
इस पूरे विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अंबरीश का बयान सामने आया, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया।
उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं और उनके स्वरूप का उपयोग किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम में मनोरंजन या प्रदर्शन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
अंबरीश ने कहा कि यदि किसी इवेंट मैनेजमेंट टीम या आयोजकों ने इस प्रकार की प्रस्तुति कराई है तो उनकी पहचान कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी से हिंदू समाज की अपेक्षाएं अधिक हैं, इसलिए पार्टी को भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
'इवेंट मैनेजरों को दूर रखना चाहिए'
अंबरीश ने अपने बयान में यह भी कहा कि भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाते समय तथाकथित इवेंट मैनेजरों को धार्मिक प्रतीकों से जुड़े कार्यक्रमों से दूर रखा जाना चाहिए।
उनका कहना था कि धार्मिक स्वरूपों का प्रयोग केवल श्रद्धा और मर्यादा के साथ होना चाहिए, न कि राजनीतिक आयोजनों के आकर्षण के रूप में।
बीजेपी की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
समाचार लिखे जाने तक बीजेपी की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से इसे स्थानीय स्तर पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम का हिस्सा बताया और कहा कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था।
यदि पार्टी की ओर से भविष्य में कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है तो उससे इस विवाद की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यह मुद्दा ट्रेंड करने लगा।
एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक पात्रों का उपयोग केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित रहना चाहिए।
दूसरी ओर कुछ लोगों का मत है कि कलाकार ने श्रद्धा के भाव से प्रस्तुति दी थी और इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
इस तरह सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
भारत में चुनावी और राजनीतिक कार्यक्रमों में धार्मिक प्रतीकों के उपयोग को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।
कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्वरूपों का उपयोग पूरी गरिमा और सम्मान के साथ होना चाहिए।
कानूनी और सामाजिक पहलू
भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। साथ ही सार्वजनिक आयोजनों में किसी भी धर्म या आस्था के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपेक्षा भी की जाती है।
यदि किसी घटना को लेकर शिकायत दर्ज होती है, तो संबंधित प्रशासन और पुलिस उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में अब तक किसी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक प्रभाव
उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और संस्कृति हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना रह सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि इस मामले में केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन ने भी सवाल उठाए हैं, इसलिए इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
निष्कर्ष
लखनऊ में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के स्वागत कार्यक्रम के दौरान हनुमानजी के वेश में कलाकार के नृत्य का वीडियो सामने आने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों के बाद अब विश्व हिंदू परिषद ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इस मामले में बीजेपी की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
आने वाले दिनों में यदि पार्टी, प्रशासन या संबंधित आयोजकों की ओर से कोई नया बयान या कार्रवाई होती है, तो यह मामला और स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल यह घटना धार्मिक आस्था, राजनीतिक आयोजनों और सार्वजनिक प्रस्तुतियों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर एक नई बहस को जन्म देती है।
Post a Comment