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जुनैद मलिक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट: अवैध हिरासत और परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप, दिल्ली पुलिस पर उठे सवाल


नई दिल्ली | NAYAK भारतीय नायक

दिल्ली में हाल ही में हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' से जुड़े छात्र प्रदर्शन के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। प्रदर्शन के दौरान वॉलंटियर के रूप में भोजन और पानी की व्यवस्था करने वाले जुनैद मलिक ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत, मानसिक उत्पीड़न और उनके परिवार को परेशान करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

याचिका के सामने आने के बाद यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और नागरिक अधिकारों को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।

क्या हैं जुनैद मलिक के आरोप?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुनैद मलिक ने अपनी याचिका में कहा है कि 24 जुलाई की आधी रात वह दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल से एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाकर लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोककर अपने साथ ले लिया।

याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें करीब पांच से छह घंटे तक एक वाहन में बैठाकर रखा गया, जहां उनसे लगातार पूछताछ की गई और मानसिक दबाव बनाया गया। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में निर्धारित कानूनी नियमों का पालन नहीं किया गया।

परिवार को भी किया जा रहा परेशान: याचिका

जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पुलिस की कार्रवाई केवल उनके खिलाफ ही नहीं रही, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी कथित रूप से परेशान किया जा रहा है।

याचिका में मांग की गई है कि अदालत इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराए और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।

CJP प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद

दिल्ली में हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं और स्वयंसेवकों ने भाग लिया था। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कई लोगों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

इसी क्रम में जुनैद मलिक की याचिका ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत की शुरुआती टिप्पणियों पर टिकी हैं।

दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इस याचिका पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस अपना पक्ष रख सकती है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों पर पुलिस क्या जवाब देती है और अदालत मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है तो पुलिस के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो अदालत इस मामले में विस्तृत जांच और आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।

हालांकि, अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। अदालत पहले यह तय करेगी कि मामले की सुनवाई किस प्रकार होगी और क्या केंद्र या दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा जाएगा।

फिलहाल यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। ऐसे में सभी आरोप याचिकाकर्ता के दावों पर आधारित हैं और अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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