बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के एक बयान ने एक बार फिर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। नीट पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनों के संदर्भ में उन्होंने कुछ युवा प्रदर्शनकारियों को ‘जेनरेशन गटर’ यानी गटर की पीढ़ी कह दिया। इस टिप्पणी पर अभिनेता सोनू सूद ने साफ ऐतराज जताया। वहीं कंगना ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। अभिजीत दीपके, सौरव दास और सपा सांसद डिंपल यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। पूरा मामला समझने की कोशिश करते हैं।
क्या था कंगना रनौत का विवादित बयान?
जंतर मंतर और अन्य जगहों पर चल रहे छात्र प्रदर्शनों की कुछ रील्स वायरल हुईं। इन वीडियो में युवाओं की भाषा और व्यवहार को लेकर कंगना ने इंस्टाग्राम पर कई स्टोरीज पोस्ट कीं। उन्होंने लिखा कि उन्होंने जिंदगी में एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी। रील्स देखकर उल्टी जैसा महसूस होता है। भाषा और अंदाज दोनों ही बहुत कच्चे और अपमानजनक हैं।
आगे उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों को ‘जेनरेशन गटर’ करार दिया। उनका आरोप था कि इनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ नहीं है। पढ़ाई में अच्छे नहीं, घर संभालने लायक भी नहीं, फिर भी आजादी का नारा लगाते हुए नशे, शराब और रिश्तों का महिमामंडन करते हैं और माता-पिता के पैसे पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने खासतौर पर कुछ युवा महिलाओं के व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
सोनू सूद का साफ संदेश
इस बयान के बाद जब सोनू सूद से मीडिया ने पूछा तो उन्होंने पहले कहा कि उन्होंने कंगना का पूरा बयान नहीं सुना। फिर भी उन्होंने युवाओं के महत्व पर जोर दिया। सोनू ने कहा कि युवा ही अभिनेताओं को सितारा बनाते हैं। जब तक वे आपके साथ हैं, आप आगे बढ़ते हैं। अगर वे साथ छोड़ दें तो मुश्किल हो जाती है। इसलिए सबको साथ लेकर चलना चाहिए।
जब रिपोर्टर ने उन्हें बताया कि कंगना ने जेन-जी को ‘गटर’ कहा है, तो सोनू सूद ने साफ कहा- “अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो यह बहुत शर्मनाक है। ऐसा नहीं कहा जाना चाहिए था।” उन्होंने कहावत याद दिलाई- ‘तोल-मोल के बोल’। सोच-समझकर बोलना बहुत जरूरी है क्योंकि जनता ही भगवान का दूसरा रूप है।
कंगना का स्पष्टीकरण वीडियो
विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनौत ने खुद एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि वे मीडिया के लिए यह रील बना रही हैं। उनका विरोध कुछ प्रदर्शनकारियों के अनैतिक, गटरछाप और अश्लील व्यवहार से था जो बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने हो रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में ऐसे व्यवहार को सामान्य नहीं बनाया जा सकता। बच्चों को जल्दी यौनिकता से परिचित कराने वाली हरकतों को वे स्वीकार नहीं करतीं।
उन्होंने सवाल किया- “क्या आप अपनी बेटी को ऐसा सिखाएंगे?” अनुशासन और मर्यादा कोई विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक जरूरत है। कंगना का कहना था कि मीडिया उनके खिलाफ एकजुट हो गया है जबकि वे सिर्फ गंदे व्यवहार के खिलाफ आवाज उठा रही थीं।
अभिजीत दीपके, सौरव दास और डिंपल यादव की प्रतिक्रिया
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सीधा जवाब दिया- “उन्हें सीरियस कौन लेता है?”
संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना की भाषा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को युवाओं के बारे में ऐसी भाषा नहीं बोलनी चाहिए। अगर परिवार में कोई जेन-जी सदस्य हो तो क्या वे ऐसा बोलेंगी? सौरव ने यह भी कहा कि कंगना शायद इस आंदोलन की लहर पर सवारी करने की कोशिश कर रही हैं।
कंगना ने जवाब में सौरव दास की उम्र (28 साल) का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी उम्र में वे खुद दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी थीं। उन्होंने सौरव को ‘बेकार और बेरोजगार’ तक कह दिया और कौशल सीखने की सलाह दी।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी निंदा की। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि फिल्म इंडस्ट्री से आने वाली और अच्छा काम करने वाली एक सांसद ने ऐसा असंवेदनशील बयान दिया।
क्या सीख मिलती है इस विवाद से?
यह विवाद सिर्फ एक बयान का नहीं है। यह दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों का वजन कितना होता है। युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। प्रदर्शनों में अगर कोई अमर्यादित व्यवहार होता है तो उसकी आलोचना जायज है, लेकिन पूरे जेन-जी को एक ही टोकरी में डाल देना कई लोगों को गलत लगा।
सोनू सूद का संदेश साफ है- सोच-समझकर बोलें। जनता ही असली ताकत है। कंगना का पक्ष यह है कि वे सिर्फ गलत व्यवहार के खिलाफ थीं, पूरे युवा वर्ग के खिलाफ नहीं। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आम आदमी खुद तय कर सकता है कि मर्यादा की रेखा कहां खिंचनी चाहिए।
नायक भारतीय नायक का मानना है कि बहस होनी चाहिए, लेकिन अपमान नहीं। युवाओं को सुनना होगा, उनकी चिंताओं को समझना होगा। साथ ही प्रदर्शनकारी भी अपनी भाषा और व्यवहार का ध्यान रखें। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब संवाद रहे, संवेदना रहे और सम्मान रहे।
आप क्या सोचते हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।
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