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गाजियाबाद: 8 वर्षीय अयान की करंट से मौत मामले में अल्पसंख्यक कांग्रेस ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग


गाजियाबाद | NAYAK भारतीय नायक

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के थाना टीला मोड़ क्षेत्र स्थित पसौंडा की इकबाल कॉलोनी में 8 वर्षीय मासूम अयान की करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से उठाया गया है। इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश महासचिव, अल्पसंख्यक कांग्रेस एवं लोनी विधानसभा-53 के भावी प्रत्याशी अकबर चौधरी ने 13 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

इस संबंध में जिलाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें घटना की जांच से लेकर विद्युत विभाग की जवाबदेही तय करने तक कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल की गईं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि समय रहते संबंधित विभाग ने सुरक्षा मानकों का पालन किया होता, तो मासूम अयान की जान बचाई जा सकती थी।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ क्षेत्र की इकबाल कॉलोनी में रहने वाले 8 वर्षीय अयान की करंट लगने से मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था लंबे समय से बदहाल थी और कई स्थानों पर खुले तार तथा असुरक्षित विद्युत उपकरण लोगों के लिए खतरा बने हुए थे।

घटना के बाद परिजनों ने जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का आरोप लगाया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जिलाधिकारी से मिले अकबर चौधरी

मासूम अयान की मौत के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश महासचिव, अल्पसंख्यक कांग्रेस अकबर चौधरी ने सोमवार को गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार से मुलाकात की।

उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सके।

अकबर चौधरी ने कहा कि किसी भी मासूम की जान प्रशासनिक लापरवाही के कारण नहीं जानी चाहिए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें

जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें शामिल की गईं—

  • घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए।
  • प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों, जिनमें जेई विनोद कुमार, संबंधित लाइनमैन तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारी शामिल हों, उनके विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • पीड़ित परिवार को शासन की ओर से उचित आर्थिक सहायता और न्याय उपलब्ध कराया जाए।
  • जिले में ऐसे सभी बिजली संबंधी खतरनाक स्थलों का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यमुक्त अथवा निलंबित किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी हो सके।

प्रशासन ने दिए कार्रवाई के निर्देश

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बताया गया कि विभागीय स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही रही या नहीं।

बिजली सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

अयान की मौत के बाद क्षेत्र में बिजली सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में खुले तार, झूलती लाइनें, टूटे बिजली पोल और खराब ट्रांसफार्मर जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद समय पर सुधार नहीं होने का आरोप लगाया जाता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बिजली से जुड़े हादसों की संभावना और बढ़ जाती है। ऐसे समय में विद्युत विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

ऊर्जा सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार बिजली से जुड़े हादसों को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण, खराब तारों का समय पर बदलाव, खुले कनेक्शनों को सुरक्षित करना तथा संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है।

इसके अलावा नागरिकों को भी बारिश के मौसम में खुले बिजली के तारों, गिरे हुए पोल और पानी से भरे क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

पीड़ित परिवार को न्याय की मांग

मासूम अयान की मौत के बाद क्षेत्र के लोगों और सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और न्याय दिलाने की मांग तेज कर दी है।

लोगों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं बल्कि कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहे शामिल?

जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान अकबर चौधरी के साथ अल्पसंख्यक कांग्रेस के उत्तर प्रदेश सचिव एडवोकेट आफराहम खान, इमरान राणा, नसीम चौधरी उर्फ गोलू, जुनैद सैफी तथा मुदस्सर खान भी मौजूद रहे।

सभी ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

भविष्य के लिए क्या जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल हादसे के बाद कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। आवश्यक है कि बिजली विभाग नियमित सुरक्षा ऑडिट कराए, संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार करे और संभावित खतरों को समय रहते दूर करे।

साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को पहले ही रोका जा सके।

निष्कर्ष

गाजियाबाद के पसौंडा में 8 वर्षीय अयान की करंट लगने से हुई मौत ने एक बार फिर सार्वजनिक सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अल्पसंख्यक कांग्रेस द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। वहीं पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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