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एसआईआर के तीसरे चरण में 22 लाख मतदाता सूची से बाहर, चार राज्यों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर उठे सवाल


नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया के तीसरे चरण के बाद देश के चार राज्यों—मिज़ोरम, ओडिशा, मणिपुर और सिक्किम—की मसौदा मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन चार राज्यों में करीब 22 लाख मतदाताओं के नाम प्रारंभिक मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं। इसके बाद राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

हालांकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि यह अंतिम मतदाता सूची नहीं है और जिन लोगों के नाम फिलहाल सूची में नहीं हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

क्या है एसआईआर (Special Intensive Revision)?

एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना होता है।

इस प्रक्रिया के दौरान कई बिंदुओं की जांच की जाती है—

  • मृत मतदाताओं के नाम हटाना
  • एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को समाप्त करना
  • स्थायी रूप से स्थान बदल चुके लोगों का सत्यापन
  • नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण
  • रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को ठीक करना

चुनाव आयोग का कहना है कि इस पूरी कवायद का मकसद केवल स्वच्छ और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करना है।

चार राज्यों में कितना बदलाव?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन चार राज्यों का संयुक्त मतदाता आधार लगभग 3.68 करोड़ था।

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 3.46 करोड़ रह गई।

यानी लगभग 22 लाख मतदाताओं के नाम प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं हैं।

यही आंकड़ा अब राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है।

किन राज्यों में लागू हुई प्रक्रिया?

एसआईआर के तीसरे चरण में शामिल प्रमुख राज्य हैं—

  • मिज़ोरम
  • ओडिशा
  • मणिपुर
  • सिक्किम

इन राज्यों में स्थानीय प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों ने घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों की जांच तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ड्राफ्ट सूची तैयार की है।

नाम हटने के संभावित कारण

चुनावी अधिकारियों के अनुसार किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने के कई कारण हो सकते हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • दस्तावेजों का अधूरा होना
  • सत्यापन के दौरान व्यक्ति का उपलब्ध न होना
  • निवास स्थान बदल जाना
  • मृत्यु के बाद रिकॉर्ड अपडेट होना
  • डुप्लीकेट पंजीकरण
  • तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटियां

इसी वजह से आयोग अंतिम सूची जारी करने से पहले दावा-आपत्ति की प्रक्रिया रखता है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि ड्राफ्ट सूची को अंतिम सूची नहीं माना जाना चाहिए।

यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन देकर अपना नाम दोबारा शामिल करा सकता है।

इसके लिए संबंधित निर्वाचन कार्यालय में आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे और सत्यापन के बाद पात्र पाए जाने पर नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

ड्राफ्ट सूची सामने आने के बाद कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है।

कुछ विपक्षी नेताओं ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का सूची से बाहर होना गंभीर विषय है और इसकी विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए।

उनका कहना है कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

दूसरी ओर कुछ नेताओं का मानना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करना जरूरी है ताकि फर्जी या दोहराए गए नाम हटाए जा सकें।

चुनाव विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

चुनाव प्रक्रिया का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण आवश्यक होता है।

लेकिन इसके साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं—

  • सत्यापन पूरी पारदर्शिता से हो।
  • पात्र मतदाता का नाम गलती से न हटे।
  • दावा और आपत्ति प्रक्रिया आसान हो।
  • ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पर्याप्त जानकारी पहुंचे।
  • अंतिम सूची जारी होने से पहले सभी शिकायतों का निपटारा किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिक के मतदान अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

यदि आपका नाम सूची में नहीं है तो क्या करें?

यदि किसी नागरिक को लगता है कि उसका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो वह—

  • संबंधित बीएलओ (BLO) से संपर्क कर सकता है।
  • निर्वाचन कार्यालय में आवेदन दे सकता है।
  • आवश्यक पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज जमा कर सकता है।
  • निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा दर्ज करा सकता है।

सत्यापन के बाद पात्र पाए जाने पर नाम अंतिम सूची में शामिल किया जा सकता है।

लोकतंत्र में मतदाता सूची का महत्व

मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं है, तो वह मतदान के अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग नहीं कर पाएगा।

इसी कारण चुनाव आयोग प्रत्येक चुनाव से पहले सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया अपनाता है।

हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि किसी पात्र मतदाता का नाम अनजाने में न हटे।

आगे क्या होगा?

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया चलेगी।

इसके बाद अधिकारियों द्वारा सभी आवेदनों की जांच की जाएगी और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, जो आगामी चुनावों में उपयोग की जाएगी।

निष्कर्ष

मिज़ोरम, ओडिशा, मणिपुर और सिक्किम में एसआईआर के तीसरे चरण के बाद लगभग 22 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने से चुनावी प्रक्रिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की नियमित प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल और नागरिक संगठन यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।

अब सबकी निगाहें दावा-आपत्ति प्रक्रिया और उसके बाद जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम दोबारा जोड़े जाते हैं और अंतिम सूची का स्वरूप क्या होता है।

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