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सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता: 11 दिन के अनशन में 7 किलो से अधिक वजन घटा, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी


नई दिल्ली | नायक भारतीय नायक (NayakMedia.in)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच शिक्षाविद, इंजीनियर और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। 11 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक का वजन सात किलोग्राम से अधिक घट चुका है। बुधवार को जारी मेडिकल बुलेटिन में डॉक्टरों ने बताया कि उनकी शारीरिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक कमजोर हुई है और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।

यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य का मामला नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, कथित परीक्षा अनियमितताओं और सरकार की जवाबदेही को लेकर उठ रही व्यापक मांगों का प्रतीक बनता जा रहा है। जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग अपनी मांगों के समर्थन में जुटे हुए हैं।

11 दिन के अनशन का असर, तेजी से घटा वजन

बुधवार सुबह जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक का वजन घटकर 59.40 किलोग्राम रह गया है। भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से उनके शरीर का वजन सात किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है।

डॉक्टरों द्वारा जारी स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार—

  • वजन: 59.40 किलोग्राम
  • बैठने की स्थिति में रक्तचाप: 103/68 mmHg
  • लेटे रहने पर रक्तचाप: 111/73 mmHg
  • हृदय गति: 74 प्रति मिनट
  • ब्लड शुगर: 75 mg/dL
  • ऑक्सीजन सैचुरेशन: 98 प्रतिशत

हालांकि ऑक्सीजन स्तर सामान्य बताया गया है, लेकिन लगातार उपवास के कारण शरीर में कमजोरी, ऊर्जा की कमी और वजन में तेज गिरावट डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

डॉक्टरों की निगरानी में हैं वांगचुक

चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी सेहत की निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक केवल पानी या सीमित तरल पदार्थों के सहारे रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि अनशन आगे भी जारी रहता है तो स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक भूख हड़ताल करने वाले व्यक्ति में मांसपेशियों का क्षय, रक्तचाप में गिरावट, कमजोरी, चक्कर आना और कई बार अंगों के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होती है।

आखिर किस मुद्दे पर हो रहा है प्रदर्शन?

जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को इन मामलों में जवाबदेही तय करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

इसी मांग को लेकर विभिन्न छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

आंदोलन का 19वां दिन

यह प्रदर्शन अब 19 दिनों से जारी है। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और छात्रों ने आंदोलन को समर्थन दिया है। सोनम वांगचुक का अनशन आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक देश के जाने-माने शिक्षाविद, नवाचार विशेषज्ञ और जलवायु कार्यकर्ता हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

उनके द्वारा विकसित शैक्षणिक मॉडल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। वे हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण, सतत विकास और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण के मुद्दों पर लंबे समय से काम करते रहे हैं।

युवाओं के बीच उनकी पहचान एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है जो शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

हाल के समय में देश में कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं। पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों में देरी और चयन प्रक्रिया पर सवालों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो युवाओं का भरोसा व्यवस्था से कमजोर हो सकता है। ऐसे में सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए यह आवश्यक है कि वे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाएं।

सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर

अब तक इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि प्रदर्शनकारी लगातार सरकार से बातचीत और समाधान की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस आंदोलन को लेकर चर्चा तेज है। कई संगठनों ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि 10 से अधिक दिनों तक चलने वाला अनशन शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। लगातार कैलोरी की कमी से शरीर पहले वसा और बाद में मांसपेशियों का उपयोग ऊर्जा के लिए करने लगता है। इससे वजन तेजी से गिरता है और कमजोरी बढ़ती है।

यदि समय रहते पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो हृदय, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

आगे क्या?

सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकलता, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता वांगचुक की सेहत को लेकर बनी हुई है, क्योंकि लगातार घटता वजन और लंबा अनशन उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

निष्कर्ष

जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन अब केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। दूसरी ओर, 11 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने इस आंदोलन को और संवेदनशील बना दिया है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के आधार पर तैयार किया गया है। यदि संबंधित पक्षों की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान जारी होता है, तो समाचार को उसी अनुसार अद्यतन किया जाएगा।)

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